Reserve Bank of India (RBI) इन दिनों बाजार की आलोचनाओं का सामना कर रहा है। पॉलिसी बयानों और MPC मिनट्स के बीच अंतर, और अचानक से FCNR(B) स्वैप विंडो की डेडलाइन **31 अगस्त, 2026** तक बढ़ाए जाने के फैसले ने बैंकिंग स्टॉक्स में हलचल मचा दी है।
स्वैप विंडो पर अचानक बदलाव से हड़कंप
सेंट्रल बैंक के FCNR(B) फॉरेन करेंसी स्वैप विंडो को अचानक बंद करने के फैसले ने मार्केट पार्टिसिपेंट्स को हैरान कर दिया है। यह कदम इसलिए भी चौंकाने वाला था क्योंकि अगस्त की शुरुआत में ही बैंक ने संकेत दिए थे कि ऐसी कोई योजना नहीं है। यह स्वैप विंडो बैंकों के लिए लिक्विडिटी मैनेजमेंट का एक बड़ा जरिया रही है, और इस अचानक बदलाव ने बैंकों को अपनी हेजिंग स्ट्रैटेजी तुरंत बदलने पर मजबूर कर दिया है।
बता दें कि स्वैप स्कीम के तहत फॉरेक्स इनफ्लो $72.8 बिलियन (21 अगस्त, 2026 तक) तक पहुंच गया था। इस घोषणा के बाद HDFC Bank, ICICI Bank, Kotak Mahindra Bank और State Bank of India जैसे बड़े बैंकों के शेयरों पर दबाव देखा गया।
कम्युनिकेशन गैप की समस्या
स्वैप विंडो के अलावा, गवर्नर के न्यूट्रल स्टैंड और MPC मिनट्स की 'सावधानीपूर्ण' भाषा के बीच का अंतर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। अगस्त में रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा गया था, लेकिन बाद में जारी मिनट्स से पता चला कि सदस्य महंगाई को लेकर काफी चिंतित थे। State Bank of India की रिसर्च ने इसे 'चॉक एंड चीज' (बिल्कुल विपरीत) जैसा अंतर बताया है।
निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
बैंक और डेट मार्केट की स्थिरता के लिए RBI की पारदर्शी गाइडेंस सबसे जरूरी है। अब निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सेंट्रल बैंक आने वाले समय में अपने बयानों में एकरूपता लाएगा। फिलहाल 5.25% के रेपो रेट पर आगे का रुख और स्वैप विंडो क्लोजर के बाद लिक्विडिटी की स्थिति पर बारीक नजर रखना जरूरी है।
