Reserve Bank of India (RBI) ने SC/ST वर्ग के लिए क्रेडिट एक्सेस को आसान बनाने हेतु एक नया मास्टर सर्कुलर जारी किया है। अब किसी भी लोन आवेदन को रिजेक्ट करने के लिए ब्रांच मैनेजर को उच्च अधिकारियों से समीक्षा करानी होगी और कारण स्पष्ट करना होगा।
लोन रिजेक्शन अब नहीं होगा आसान
RBI ने 1 अक्टूबर, 2026 को जारी अपने मास्टर सर्कुलर में बैंकों के लिए नई गाइडलाइंस तय कर दी हैं। अब तक ब्रांच मैनेजरों के पास लोन आवेदनों को सीधे रिजेक्ट करने का अधिकार था, लेकिन अब किसी भी आवेदन को खारिज करने से पहले उसे उच्च प्रशासनिक अधिकारियों के पास भेजना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, बैंक को लिखित में यह बताना होगा कि लोन क्यों रिजेक्ट किया गया है। यह कदम सरकारी योजनाओं के तहत लोन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और भेदभाव को खत्म करने के लिए उठाया गया है।
बैंकों के लिए चुनौती और कंप्लायंस का बोझ
नियमों के अनुसार, बैंकों को 'Differential Rate of Interest' (DRI) स्कीम के तहत कुल लोन का 40% हिस्सा SC/ST लाभार्थियों को रियायती दरों पर देना ही होगा। साथ ही, अब बैंकों को सरकार प्रायोजित स्कीमों के तहत लोन के लिए किसी भी प्रकार की डिपॉजिट की मांग करने से मना किया गया है। इन नियमों के पालन के लिए बैंकों को अपने हेड ऑफिस में एक मॉनिटरिंग सेल बनाना होगा, जो हर तिमाही में क्रेडिट फ्लो की समीक्षा करेगा।
निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?
शेयर बाजार के निवेशकों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे बैंकों के ऑपरेटिंग खर्च (Operational Costs) में बढ़ोतरी हो सकती है। बढ़ते कंप्लायंस और प्रशासनिक बोझ का असर बैंक के मार्जिन पर दिख सकता है। इसके अलावा, प्राथमिकता प्राप्त सेक्टर में लोन बांटते समय एसेट क्वालिटी (Asset Quality) पर नजर रखना अब और भी चुनौतीपूर्ण होगा। निवेशकों को आगामी तिमाही नतीजों के दौरान मैनेजमेंट की कमेंट्री पर नजर रखनी चाहिए कि ये नए नियम उनके रूरल और सेमी-अर्बन लोन बुक को किस तरह प्रभावित कर रहे हैं।
