RBI Survey: शहरी उपभोक्ताओं का भरोसा टूटा, महंगाई की मार से घबराया आम आदमी

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
RBI Survey: शहरी उपभोक्ताओं का भरोसा टूटा, महंगाई की मार से घबराया आम आदमी

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के ताजा सर्वे में अर्बन कंज्यूमर कॉन्फिडेंस गिरकर **87.9** के स्तर पर आ गया है। करीब **54.5%** परिवार आर्थिक स्थिति को लेकर चिंतित हैं, वहीं रेपो रेट में **25 बेसिस पॉइंट** की बढ़ोतरी कर इसे **5.50%** कर दिया गया है।

RBI के सितंबर 2026 के 'अर्बन कंज्यूमर कॉन्फिडेंस सर्वे' में शहरी घरों की चिंताएं साफ झलक रही हैं। करंट सिचुएशन इंडेक्स 87.9 पर आ गया है, जो 100 के न्यूट्रल मार्क से नीचे है। इसका मतलब है कि लोग मौजूदा आर्थिक हालात को सकारात्मक नहीं मान रहे हैं।

रोजगार और महंगाई का डबल अटैक

सर्वे में 54.5% लोगों का मानना है कि पिछले एक साल में देश की आर्थिक स्थिति खराब हुई है, जबकि जुलाई में यह आंकड़ा 50.5% था। सबसे ज्यादा चिंता का विषय रोजगार है, जिसे 49.5% लोगों ने अपनी मुख्य समस्या बताया है। वहीं, अगले एक साल के लिए महंगाई का अनुमान बढ़कर 10% पहुंच गया है।

कंजम्पशन पर पड़ सकता है असर

खर्च में बढ़ोतरी दिख रही है, लेकिन यह डिमांड की वजह से नहीं, बल्कि जरूरी सामानों की बढ़ती कीमतों के कारण है। अगर महंगाई ऐसे ही रही, तो कंपनियों की बिक्री (volume growth) पर असर पड़ सकता है, खासकर उन सेक्टरों में जो डिसक्रिशनरी स्पेंडिंग पर निर्भर हैं।

रेपो रेट हाइक का दबाव

महंगाई को काबू में करने के लिए RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% कर दिया है। इससे होम और ऑटो लोन की EMI पर दबाव बढ़ेगा, जिससे आम आदमी का मंथली बजट और टाइट हो सकता है। अब निवेशकों की नजर कंपनियों के अगले तिमाही नतीजों पर होगी कि क्या वे इन बढ़ती कीमतों के बीच अपनी मांग बनाए रखने में कामयाब रहती हैं या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.