Reserve Bank of India (RBI) ने मंगलवार को रुपये की गिरती कीमतों को बचाने और बाजार में मौजूद अतिरिक्त लिक्विडिटी (Liquidity) को कम करने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। केंद्रीय बैंक ने डॉलर की बिक्री और स्वैप डील के जरिए मार्केट में हलचल तेज कर दी है।
रुपये की गिरती चाल पर लगाम
मंगलवार को फॉरेक्स मार्केट में अफरातफरी का माहौल रहा। रुपये में आई कमजोरी को रोकने के लिए सरकारी बैंकों ने RBI के इशारे पर भारी मात्रा में डॉलर बेचे। रुपये का भाव इंट्राडे में 84.43 के निचले स्तर तक पहुंच गया था। इस गिरावट के पीछे मजबूत अमेरिकी डॉलर, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव मुख्य वजहें हैं।
सिस्टम से लिक्विडिटी गायब करने की कवायद
RBI केवल डॉलर ही नहीं बेच रहा, बल्कि सिस्टम से एक्स्ट्रा कैश भी निकाल रहा है। सितंबर की शुरुआत में लिक्विडिटी रिकॉर्ड 11.16 ट्रिलियन रुपये पर पहुंच गई थी, जिसे कम करने के लिए RBI ने स्वैप डील, बॉन्ड बिक्री और वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो ऑक्शन का सहारा लिया है। मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में RBI अब तक 1 ट्रिलियन रुपये के नेट बॉन्ड बेच चुका है, जो पिछले एक दशक में सबसे बड़ा आंकड़ा है।
निवेशकों के लिए संकेत
अगले कुछ दिनों तक बाजार की नजर 5-7 अक्टूबर को होने वाली RBI की पॉलिसी मीटिंग पर टिकी है। बाजार में चर्चा है कि महंगाई पर लगाम लगाने के लिए RBI का रुख 'Hawkish' हो सकता है या ब्याज दरों में बढ़ोतरी भी की जा सकती है। जैसे-जैसे सिस्टम से लिक्विडिटी कम होगी, शॉर्ट-टर्म में उधार लेना महंगा हो सकता है। निवेशकों को सावधान रहने की जरूरत है क्योंकि लिक्विडिटी में सख्ती का असर आने वाले समय में इक्विटी और डेट मार्केट दोनों पर पड़ेगा।
