RBI की डॉलर बिकवाली ने थामा रुपये का पहिया
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मार्च महीने में फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में बड़े पैमाने पर दखल दिया। केंद्रीय बैंक ने स्पॉट मार्केट में $9.758 अरब डॉलर की नेट बिकवाली की। यह फरवरी के मुकाबले एक बड़ा बदलाव है, जब RBI डॉलर खरीद रहा था। मार्च में कुल $29.638 अरब डॉलर की बिकवाली हुई, जबकि $19.880 अरब डॉलर की खरीद हुई। इससे साफ है कि RBI रुपये की अस्थिरता को काबू में करने के लिए पूरी कोशिश कर रहा था।
कच्चे तेल और भू-राजनीति का असर
अप्रैल में भारतीय रुपये पर दबाव देखा गया, जिसका मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वेस्ट एशिया में बढ़ी भू-राजनीतिक टेंशन थी। RBI के दखल ने रुपये को सहारा दिया, लेकिन इसकी चाल अभी भी ग्लोबल ऑयल मार्केट और खास घटनाओं पर टिकी हुई है। इन दबावों के बावजूद, रुपये की क्लोजिंग 83.23 प्रति डॉलर के स्तर पर हुई, जिसमें गिरती तेल कीमतों और RBI के लगातार सपोर्ट की उम्मीद का बड़ा योगदान रहा।
मजबूत रिजर्व और FDI से मिली आर्थिक सुरक्षा
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) काफी मजबूत स्थिति में है, जो देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा सहारा है। दिसंबर 2025 तक, यह रिजर्व लगभग 11 महीनों के गुड्स इंपोर्ट (आयात) और देश के कुल एक्सटर्नल डेट (बाहरी कर्ज) का 90% कवर करने के लिए पर्याप्त था। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के दौरान फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) इनफ्लो भी मजबूत रहा। ग्रॉस और नेट दोनों इनफ्लो पिछले साल से बेहतर थे। मार्च में लगातार दूसरे महीने नेट FDI पॉजिटिव रहा।
बाजार का नजरिया
RBI का यह कदम कई अन्य इमर्जिंग मार्केट के सेंट्रल बैंकों के रुख से अलग है। हालांकि RBI के फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व दुनिया में सबसे बड़े रिजर्व में से एक हैं। अन्य इमर्जिंग मार्केट के सेंट्रल बैंकों ने भी करेंसी मार्केट में दखल दिया है, लेकिन उनका पैमाना और फ्रीक्वेंसी अलग-अलग रही है। एनालिस्ट्स का मानना है कि भारतीय रुपये की स्थिरता पर सतर्कता भरा भरोसा बना रहेगा। यह ग्लोबल एनर्जी की कीमतों में नरमी और भू-राजनीतिक जोखिमों के कम होने पर निर्भर करेगा। RBI का संकेत है कि जरूरत पड़ने पर वह और भी दखल देने के लिए तैयार है।
