Rupee बचाने के लिए RBI का बड़ा कदम, अक्टूबर में बेचे **$18.2 बिलियन**

RBI
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
Rupee बचाने के लिए RBI का बड़ा कदम, अक्टूबर में बेचे **$18.2 बिलियन**

भारतीय रुपये की गिरती चाल को थामने के लिए Reserve Bank of India (RBI) ने अक्टूबर के शुरुआती आधे हिस्से में **$18.2 बिलियन** की भारी बिकवाली की है। यह इस साल का अब तक का सबसे बड़ा इंटरवेंशन (Intervention) है।

रुपये में आ रही कमजोरी को थामने के लिए केंद्रीय बैंक पूरी तरह से एक्टिव है। अक्टूबर की 1 तारीख से 16 तारीख के बीच RBI ने मार्केट में $18.20 बिलियन की लिक्विडिटी उतारी है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, वेस्ट एशिया में चल रहे तनाव और विदेशी निवेशकों (FIIs) द्वारा भारतीय शेयर बाजार से लगातार पैसा निकालने के कारण रुपये पर जबरदस्त दबाव बना हुआ है।

करेंसी पर क्यों है दबाव?

हाल के दिनों में रुपया काफी संघर्ष कर रहा है। इसके पीछे दो बड़े कारण हैं—पहला, विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय शेयरों से पूंजी निकालना और दूसरा, क्रूड ऑयल के महंगे होने से आयात (Import) बिल का बढ़ना। सितंबर में कुछ डिपॉजिट स्कीम्स के बंद होने से रुपये को मिलने वाला एक सपोर्ट सिस्टम हट गया है, जिससे यह ग्लोबल उतार-चढ़ाव के प्रति और ज्यादा संवेदनशील हो गया है।

फॉरेक्स रिजर्व पर असर

RBI की इस आक्रामक बिकवाली का असर देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) पर साफ दिख रहा है। सितंबर के शुरुआत में रिजर्व $785.706 बिलियन के पीक पर था, जो अक्टूबर के मध्य तक घटकर $721.016 बिलियन पर आ गया है। हालांकि यह आंकड़ा अभी भी ऐतिहासिक रूप से मजबूत है, लेकिन तेजी से हो रही गिरावट ने निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा दी है कि अगर मार्केट में उठा-पटक जारी रही तो RBI कब तक इस गति से सपोर्ट कर पाएगा।

फॉरवर्ड बुक की चुनौती

बाजार के जानकार अब RBI की 'फॉरवर्ड बुक' (Forward Book) पर नजर रखे हुए हैं। अगस्त तक केंद्रीय बैंक की नेट शॉर्ट पोजीशन $200.06 बिलियन रही है, जो काफी हद तक लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स से जुड़ी है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या साल के अंत तक डॉलर की बढ़ती मांग के सामने RBI अपनी इस रणनीति को बरकरार रख पाएगा या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.