Reserve Bank of India (RBI) ने बैंकिंग सेक्टर के लिए दो बड़े फैसले लिए हैं। जिन बैंकों का डेरिवेटिव एक्सपोजर **₹25,000 करोड़** से ज्यादा है, उनके लिए नए रिस्क नियम अनिवार्य कर दिए गए हैं, साथ ही रेपो रेट को **25 bps** बढ़ाकर **5.50%** कर दिया गया है।
डेरिवेटिव्स पर नए नियम
केंद्रीय बैंक ने 'Reserve Bank of India (Commercial Banks – Forthcoming Instructions) Amendment Directions, 2026' के तहत बड़े बैंकों के लिए Standardised Approach for Counterparty Credit Risk (SA-CCR) लागू करने का फैसला लिया है। यह नियम उन बैंकों पर लागू होगा जिनका कंसोलिडेटेड डेरिवेटिव एक्सपोजर ₹25,000 करोड़ से अधिक है। छोटे बैंकों के लिए अभी Current Exposure Method (CEM) और SA-CCR के बीच चुनाव करने की छूट दी गई है।
रेपो रेट में इजाफा
महंगाई को काबू में करने के लिए RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने रेपो रेट में 25 आधार अंकों (bps) की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% कर दिया है। इसका सीधा असर बैंक लोन की ब्याज दरों पर पड़ेगा, जिससे ग्राहकों के लिए कर्ज महंगा हो जाएगा।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
- कॉम्प्लायंस का बोझ: बड़े बैंकों को अब अपनी बैलेंस शीट में अधिक कैपिटल बफर रखना होगा, जिससे उनके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आ सकता है।
- लोन डिमांड: बढ़ती ब्याज दरों के चलते कंज्यूमर और बिजनेस लोन की मांग में सुस्ती देखी जा सकती है।
- बैंकिंग पर असर: हालांकि बैंक शॉर्ट टर्म में अपने नेट इंटरेस्ट मार्जिन को मैनेज करने की कोशिश करेंगे, लेकिन आगे की राह अब चुनौतीपूर्ण हो सकती है। अब निवेशकों की नजर बैंकों की अगली कमेंट्री और तिमाही नतीजों पर टिकी रहेगी।
