RBI का बड़ा एक्शन: सिस्टम से ₹14 लाख करोड़ की नकदी निकालने के लिए RBI ने शुरू की बॉन्ड बिक्री

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
RBI का बड़ा एक्शन: सिस्टम से ₹14 लाख करोड़ की नकदी निकालने के लिए RBI ने शुरू की बॉन्ड बिक्री

बैंकिंग सिस्टम में जरूरत से ज्यादा नकदी के दबाव को कम करने के लिए Reserve Bank of India (RBI) ने बड़ा कदम उठाया है। सेंट्रल बैंक ने **₹1 लाख करोड़** के बॉन्ड बेचने का प्रोग्राम शुरू किया है, क्योंकि सिस्टम में अतिरिक्त नकदी **₹14 लाख करोड़** के स्तर पर पहुंच गई थी।

लिक्विडिटी का गणित

RBI अपनी अक्टूबर की मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग से पहले मार्केट की नब्ज दुरुस्त करने में जुटा है। असल में, सिस्टम में इतनी ज्यादा नकदी आ गई है कि RBI की ब्याज दरों में बदलाव का असर इकोनॉमी पर ठीक से नहीं हो पा रहा है। इसका मुख्य कारण FCNR (Foreign Currency Non-Resident) डिपॉजिट्स में भारी उछाल है, जो अगस्त के अंत तक $127.2 बिलियन पहुंच गए थे।

क्यों बेचे जा रहे हैं बॉन्ड?

जब बैंकों के पास बहुत ज्यादा कैश होता है, तो उन्हें RBI से कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे सेंट्रल बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी बेअसर हो जाती है। इसे ठीक करने के लिए RBI ने ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO) का रास्ता चुना है।

निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?

इस कदम का तुरंत असर बॉन्ड यील्ड पर दिखा है, जो बढ़कर 7% के ऊपर यानी 4 महीने की ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। ध्यान रहे, जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो मौजूदा बॉन्ड की कीमतें गिरती हैं। इससे सरकारी सिक्योरिटीज रखने वाले बैंकों को 'मार्क-टू-मार्केट' नुकसान हो सकता है।

RBI का लक्ष्य 'वेटेड एवरेज कॉल रेट' को 'रेपो रेट' के साथ अलाइन करना है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि संतुलन बनाने के लिए RBI को आगे चलकर ₹4 लाख करोड़ तक की और लिक्विडिटी सिस्टम से निकालनी पड़ सकती है, जिससे आने वाले समय में इंटरेस्ट रेट्स का ट्रेंड तय होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.