RBI का बड़ा दावा: क्या अब रिकवरी की राह पर है Rupee? $100 बिलियन के सरप्लस का है लक्ष्य

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
RBI का बड़ा दावा: क्या अब रिकवरी की राह पर है Rupee? $100 बिलियन के सरप्लस का है लक्ष्य

RBI की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने भारतीय रुपये को लेकर एक पॉजिटिव आउटलुक पेश किया है। विदेशी मुद्रा प्रवाह में आई **$133 बिलियन** की तेजी और मजबूत बैलेंस ऑफ पेमेंट के दम पर रुपये में जल्द रिकवरी की उम्मीद है, जिसने निवेशकों के लिए नए संकेत दिए हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रुपये की चाल को लेकर एक सकारात्मक तस्वीर पेश की है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के बैंकिंग एंड इकोनॉमिक्स कॉन्क्लेव में डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने साफ किया कि मार्च 2025 से सितंबर 2026 के बीच रुपये में आई 13.1% की गिरावट मुख्य रूप से बाहरी अस्थिरता का परिणाम थी, न कि भारतीय अर्थव्यवस्था की कमजोरी।

मजबूती की मुख्य वजह

केंद्रीय बैंक का भरोसा बैलेंस ऑफ पेमेंट में हुए बड़े सुधार पर टिका है। जून में लागू की गई रणनीतिक नीतियों के चलते विदेशी मुद्रा का प्रवाह जबरदस्त बढ़ा है। फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट (FCNR) डिपॉजिट्स में $133 बिलियन का फंड आया है। इन आंकड़ों के दम पर RBI को उम्मीद है कि फाइनेंशियल ईयर 2027 में टोटल बैलेंस ऑफ पेमेंट सरप्लस $100 बिलियन के स्तर तक पहुंच सकता है।

निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?

रुपये की मजबूती का शेयर बाजार के अलग-अलग सेक्टर्स पर सीधा असर पड़ेगा:

  • इंपोर्ट-बेस्ड कंपनियां: ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) और कंज्यूमर गुड्स मैन्युफैक्चरर्स को फायदा होगा, क्योंकि कच्चा माल सस्ता पड़ेगा।
  • एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर: IT और फार्मा जैसी कंपनियां, जो विदेशी मुद्रा में कमाई करती हैं, उनके मार्जिन पर दबाव देखा जा सकता है।

RBI अपनी मजबूत फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व का इस्तेमाल बाजार में उतार-चढ़ाव को थामने के लिए करता रहेगा ताकि अर्थव्यवस्था बाहरी झटकों से सुरक्षित रहे। फिलहाल निवेशकों को ग्लोबल एनर्जी प्राइसेज और ट्रेड डेटा पर अपनी नजर रखनी चाहिए, जो रुपये की आगामी दिशा तय करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.