Brent crude के **$107** प्रति बैरल के पार निकलने और बैंकिंग सिस्टम में **₹10 लाख करोड़** से ज्यादा की लिक्विडिटी के कारण, RBI अक्टूबर में रेपो रेट में **25 bps** की बढ़ोतरी कर सकता है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की आगामी मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक, जो 5-7 अक्टूबर, 2026 को होने वाली है, अब निवेशकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। बाजार के जानकारों और Emkay Global व SBI Research जैसी ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि RBI अब ब्याज दरों में 25 bps की बढ़ोतरी करने का फैसला ले सकता है।
कच्चे तेल से महंगाई का खतरा
इस संभावित कदम के पीछे सबसे बड़ी वजह ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल है। Brent crude के $107 प्रति बैरल के स्तर को पार करने से घरेलू स्तर पर महंगाई बढ़ने का डर है। जानकारों का अनुमान है कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो हेडलाइन महंगाई 6.5% तक पहुंच सकती है। यूरोपियन सेंट्रल बैंक की तरह, अब RBI भी ग्लोबल ट्रेंड के साथ तालमेल बैठाने की कोशिश करेगा ताकि भारतीय करेंसी की स्थिरता बनी रहे।
सिस्टम में फंसी नकदी (Liquidity Surplus)
महंगाई के अलावा, RBI के सामने एक बड़ी चुनौती बैंकिंग सिस्टम में मौजूद सरप्लस लिक्विडिटी है। FCNR(B) स्वैप विंडो के जरिए आए करीब $136.4 बिलियन के इनफ्लो ने बैंकिंग सिस्टम में भारी नकदी जमा कर दी है। 9 सितंबर, 2026 तक यह लिक्विडिटी सरप्लस लगभग ₹10.5 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी इस अतिरिक्त कैश को सोखने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में एक प्रभावी हथियार साबित हो सकती है।
अर्थव्यवस्था पर असर
अगर दरें बढ़ती हैं, तो इसका सीधा असर कर्ज लेने वालों पर पड़ेगा। लोन की ईएमआई (EMI) महंगी हो सकती है, जिससे कंज्यूमर स्पेंडिंग और बिजनेस एक्सपेंशन की रफ्तार थोड़ी धीमी हो सकती है। अब सभी की निगाहें RBI के अगले कदम और उनके ऑफिशियल कमेंट्री पर टिकी हैं, जहां से यह साफ होगा कि वे महंगाई को रोकने और ग्रोथ को बनाए रखने के बीच संतुलन कैसे बिठाएंगे।
