Reserve Bank of India (RBI) ने 31 अगस्त, 2026 को ₹3 लाख करोड़ का वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) ऑक्शन करने का ऐलान किया है। इसका मकसद सिस्टम में मौजूद करीब ₹3.75 लाख करोड़ के सरप्लस कैश को नियंत्रित करना है ताकि महंगाई और ब्याज दरों में संतुलन बना रहे।
लिक्विडिटी का गणित
भारतीय बैंकिंग सिस्टम में इस समय भारी मात्रा में कैश जमा है, जिसे मैनेज करने के लिए RBI ने कमान संभाल ली है। सेंट्रल बैंक 31 अगस्त, 2026 को 3-दिन का VRRR ऑक्शन आयोजित करेगा। यह कदम तब उठाया गया है जब 27 अगस्त, 2026 तक सिस्टम की लिक्विडिटी करीब ₹3.75 लाख करोड़ के स्तर पर पहुंच गई थी।
क्यों बढ़ रहा है इतना सरप्लस कैश?
इस अतिरिक्त नकदी की मुख्य वजह फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट (FCNR) डिपॉजिट्स में आया बड़ा उछाल है। जून से अगस्त 2026 के बीच, बैंकिंग सेक्टर में करीब $65 अरब की राशि जमा हुई है। इस सरप्लस की वजह से शॉर्ट-टर्म मार्केट इंटरेस्ट रेट्स में गिरावट का डर बना रहता है, जिसे रोकने के लिए RBI 5.25% की रेपो रेट के आसपास स्थिरता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
बैंकों के पास ज्यादा कैश होना उनके नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर दबाव डाल सकता है, क्योंकि इस खाली पड़े फंड को मुनाफे के साथ निवेश करने के मौके सीमित हैं। इसके अलावा, अगस्त 2026 में शेयर बाजार की वोलेटिलिटी भी चर्चा में रही, जिसका एक कारण नया 'क्लोजिंग-ऑक्शन सिस्टम' भी है। हालांकि यह RBI के एक्शन से अलग है, लेकिन निवेशकों को लिक्विडिटी मैनेजमेंट और सेंट्रल बैंक के अगले कदमों पर करीबी नजर रखनी होगी।
