Banking Sector: बढ़ता Credit-Deposit Ratio खतरे की घंटी नहीं, RBI ने निवेशकों को दी बड़ी राहत

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AuthorNeha Patil|Published at:
Banking Sector: बढ़ता Credit-Deposit Ratio खतरे की घंटी नहीं, RBI ने निवेशकों को दी बड़ी राहत

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने साफ कर दिया है कि बैंकों का बढ़ता क्रेडिट-डिपॉजिट (CD) रेशियो चिंता का विषय नहीं है। मार्च 2026 में यह रेशियो **82.2%** पर पहुंच गया था, लेकिन सेंट्रल बैंक ने मजबूत कैपिटल बफर का हवाला देकर किसी भी बड़े रिस्क से इनकार किया है।

क्या वाकई बैंकिंग सिस्टम दबाव में है?

हाल के दिनों में बैंकों के क्रेडिट-डिपॉजिट (CD) रेशियो में आई तेजी को लेकर मार्केट में काफी चर्चा थी। मार्च 2026 तक यह रेशियो 82.2% के स्तर पर पहुंच गया, जो सितंबर 2021 में महज 68.6% था। इस उछाल को देखकर निवेशकों के मन में यह सवाल उठ रहा था कि क्या बैंक ओवर-लीवरेज्ड हो रहे हैं या लिक्विडिटी क्राइसिस की ओर बढ़ रहे हैं।

RBI का क्या है नजरिया?

RBI ने अपनी लेटेस्ट असेसमेंट में स्पष्ट किया है कि केवल इस एक आंकड़े को बैंकिंग अस्थिरता का पैमाना नहीं माना जा सकता। सेंट्रल बैंक के मुताबिक, अब बैंकिंग के तरीके बदल चुके हैं। आज के समय में लोन बांटने से ही फाइनेंशियल नेटवर्क में नए डिपॉजिट जेनरेट होते हैं। साथ ही, बैंक अब अपने बैलेंस शीट में बदलाव कर रहे हैं, जहां उनका फोकस इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो से हटकर एक्टिव क्रेडिट एक्सपेंशन की ओर बढ़ा है।

निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?

निवेशकों की चिंता यह है कि अगर लोन ग्रोथ, डिपॉजिट ग्रोथ से बहुत आगे निकल गई, तो बैंकों को फंड जुटाने के लिए महंगे शॉर्ट-टर्म सोर्स जैसे कि सर्टिफिकेट्स ऑफ डिपॉजिट (CDs) पर निर्भर रहना पड़ेगा। इससे नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) पर दबाव आ सकता है।

हालांकि, बैंकिंग सिस्टम के फंडामेंटल्स मजबूत दिख रहे हैं:

  • GNPA रेशियो: मात्र 1.8% पर स्थिर है।
  • कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो: 17.7% का स्तर बरकरार है।
  • लिक्विडिटी कवरेज रेशियो: 124.2% है, जो रेग्युलेटरी जरूरतों से कहीं बेहतर है।

इसका सबसे बड़ा उदाहरण HDFC Bank है, जिसने मर्जर के बाद 110% के CD रेशियो को अपनी आक्रामक डिपॉजिट स्ट्रैटेजी से घटाकर लगभग 96% तक वापस लाने में सफलता हासिल की है।

आगे के लिए, निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी होगी कि बैंक कितनी तेजी से अपना लो-कॉस्ट डिपॉजिट बेस बढ़ा पा रहे हैं। भविष्य की तिमाही रिपोर्टों में फंडिंग कॉस्ट और रिटेल डिपॉजिट मोबिलाइजेशन पर मैनेजमेंट की कमेंट्री निवेश का फैसला तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.