RBI ने 22 साल के लंबे इंतजार के बाद Urban Co-operative Bank (UCB) के लिए ऑन-टैप लाइसेंसिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नए नियमों के मुताबिक, आवेदन करने वाली संस्थाओं के पास **₹10,000 करोड़** का डिपॉजिट बेस और **₹300 करोड़** की नेट वर्थ होना अनिवार्य है।
22 साल का इंतजार खत्म
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने आखिरकार Urban Co-operative Banks के लिए लाइसेंसिंग के दरवाजे फिर खोल दिए हैं। साल 2004 में गवर्नेंस और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी की चिंताओं के चलते इस पर रोक लगा दी गई थी, लेकिन अब नए ड्राफ्ट गाइडलाइन्स के जरिए बैंकिंग सेक्टर में बड़ा बदलाव लाने की तैयारी है।
कड़ी शर्तें और पैमाने
लाइसेंस पाने की रेस में वही संस्थाएं टिक पाएंगी जो RBI के सख्त मानकों पर खरी उतरेंगी। इसके लिए मुख्य क्राइटेरिया इस प्रकार हैं:
- नेट वर्थ: कम से कम ₹300 करोड़।
- डिपॉजिट बेस: न्यूनतम ₹10,000 करोड़।
- अनुभव: कम से कम 10 साल का ऑपरेशनल ट्रैक रिकॉर्ड।
- CRAR: 12% बनाए रखना होगा।
- NPA: नेट NPA रेश्यो 3% से नीचे होना अनिवार्य है।
सभी आवेदन RBI के डिजिटल PRAVAAH पोर्टल के जरिए स्वीकार किए जाएंगे, ताकि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
सेक्टर में आएगा बड़ा बदलाव
जानकारों का मानना है कि इस नीति से को-ऑपरेटिव बैंकिंग सेक्टर में कंसोलिडेशन (विलय) का दौर शुरू होगा। छोटी क्रेडिट सोसायटियों को अब अपनी ताकत बढ़ाने के लिए मर्जर करना होगा ताकि वे इन सख्त नियमों को पूरा कर सकें। इसके अलावा, नए बैंकों को साइबर सिक्योरिटी और आधुनिक तकनीक पर भी भारी निवेश करना होगा।
RBI का फोकस अब कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर है, जिसके तहत बोर्ड मेंबर्स को 'फिट एंड प्रॉपर' क्राइटेरिया पूरा करना होगा। हालांकि, इन नियमों से शॉर्ट टर्म में मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है, लेकिन यह कदम लंबी अवधि में डिपॉजिटर्स की सुरक्षा को और मजबूत करेगा। फिलहाल ये गाइडलाइन्स पब्लिक कंसल्टेशन के लिए उपलब्ध हैं और इंडस्ट्री को अब फाइनल रूल्स का इंतजार है।
