जापानी ब्रोकरेज फर्म Nomura का मानना है कि RBI अक्टूबर और दिसंबर 2026 में रेपो रेट में **0.25%** की बढ़ोतरी कर सकता है, जिससे यह **5.75%** तक पहुंच जाएगा। यह कदम खाद्य और ऊर्जा क्षेत्र की बढ़ती महंगाई को काबू में करने के लिए उठाया जा सकता है।
जापानी ब्रोकरेज हाउस Nomura ने अनुमान लगाया है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) अपनी आगामी अक्टूबर और दिसंबर की पॉलिसी मीटिंग्स में रेपो रेट में 0.25% का इजाफा कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो रेपो रेट बढ़कर 5.75% के स्तर पर पहुंच जाएगा। सेंट्रल बैंक के सामने इस समय चुनौतीपूर्ण स्थिति है, जहाँ उसे इकोनॉमिक ग्रोथ को प्रभावित किए बिना महंगाई को स्थिर रखना है।
महंगाई का बड़ा असर
इस अनुमान के पीछे मुख्य वजह बढ़ती खाद्य और ऊर्जा महंगाई है। ब्रोकरेज के अनुसार, कंज्यूमर प्राइस इन्फ्लेशन जो अगस्त में 4.8% थी, वह साल की अंतिम तिमाही तक 6.3% तक जा सकती है। मानसून की कमी के कारण खरीफ फसलों पर असर पड़ा है और मंडियों में सप्लाई टाइट हुई है। हालांकि सरकार ने चीनी पर स्टॉक लिमिट और प्याज की सबसिडी जैसे कदम उठाए हैं, लेकिन ये महंगाई के दबाव के आगे अस्थाई उपाय ही माने जा रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?
जब भी RBI रेपो रेट बढ़ाता है, तो कमर्शियल बैंक आमतौर पर अपनी ब्याज दरें बढ़ा देते हैं। इसका सीधा असर आम लोगों की लोन EMI और कंपनियों की बॉरोइंग कॉस्ट पर पड़ता है। कंपनियों के लिए कर्ज महंगा होने से उनका प्रॉफिट मार्जिन प्रभावित हो सकता है, विशेषकर उन सेक्टर्स में जहाँ कर्ज का बोझ अधिक है या मांग संवेदी (sensitive) है।
इकोनॉमी की स्थिति
भारतीय इकोनॉमी फिलहाल लचीली बनी हुई है और हालिया आंकड़े 7.8% की GDP ग्रोथ और 19.1% की मजबूत क्रेडिट ग्रोथ दिखाते हैं। हालांकि, ऊंची ब्याज दरें और कमजोर फसल पैदावार ग्रामीण खपत (rural consumption) के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती हैं। आने वाले समय में निवेशकों की नजर RBI की पॉलिसी घोषणाओं और महंगाई के आंकड़ों पर टिकी रहेगी, जो यह तय करेंगे कि सेंट्रल बैंक का अगला रुख क्या होगा।
