RBI ने रेपो रेट बढ़ाकर **5.50%** कर दी है। SBI रिसर्च का अनुमान है कि दिसंबर तक इसमें **50 बेसिस पॉइंट्स** की और बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे दर **6%** के स्तर पर पहुंच जाएगी।
रेपो रेट में बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी नीतिगत दिशा में बड़ा बदलाव करते हुए रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी की है, जिससे यह 5.50% पर पहुंच गई है। चार साल में यह पहली बार है जब केंद्रीय बैंक ने दरों में इजाफा किया है, जिसे 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' (Calibrated Tightening) का नाम दिया गया है।
SBI रिसर्च का बड़ा अनुमान
इस कदम के बाद SBI रिसर्च ने एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें यह आशंका जताई गई है कि RBI महंगाई को काबू में रखने के लिए और आक्रामक हो सकता है। जानकारों का मानना है कि दिसंबर तक रेपो रेट में कुल 50 बेसिस पॉइंट्स की और वृद्धि संभव है, जिससे यह 6% के स्तर को छू सकती है। इसका मुख्य कारण नवंबर 2026 तक कंज्यूमर प्राइस इन्फ्लेशन (CPI) का 6.8% तक पहुंचने का अनुमान है।
निवेशकों और कर्जदारों पर असर
बढ़ती ब्याज दरों का सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा। बैंक अब अपने लेंडिंग रेट्स को रेपो रेट के अनुरूप बढ़ाएंगे, जिससे होम लोन से लेकर पर्सनल लोन तक महंगे हो जाएंगे। कॉरपोरेट जगत के लिए भी यह चुनौतीपूर्ण समय है; ज्यादा ब्याज खर्च के कारण कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव दिख सकता है।
इक्विटी मार्केट्स के नजरिए से देखें, तो ब्याज दरें बढ़ने पर भविष्य की कमाई का वैल्यूएशन कम हो जाता है, जिससे शेयरों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। हालांकि, बैंकिंग सेक्टर के लिए नेट इंटरेस्ट मार्जिन में सुधार के अवसर भी बन सकते हैं।
रुपया और जीडीपी ग्रोथ
यह कदम भारतीय रुपये को गिरने से बचाने के लिए भी उठाया गया है, क्योंकि सितंबर में $2.1 बिलियन की पूंजी बाहर निकली है। अच्छी खबर यह है कि RBI ने फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.1% कर दिया है, जबकि महंगाई दर को 5.2% पर नियंत्रित रखने का लक्ष्य रखा है। अब बाजार की नजरें ग्लोबल क्रूड ऑयल के भाव और RBI के अगले फैसलों पर टिकी होंगी।
