बढ़ती महंगाई को काबू करने के लिए क्या Reserve Bank of India अक्टूबर में रेपो रेट में **25 बेसिस पॉइंट्स** की बढ़ोतरी करेगा? एक्सपर्ट्स के बीच इसे लेकर राय बंटी हुई है, जिसका असर बैंकिंग, रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर पर पड़ सकता है।
रेपो रेट पर नीतिगत बदलाव के संकेत
Reserve Bank of India की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) के सामने अक्टूबर की बैठक में एक अहम चुनौती है। वर्तमान में रेपो रेट 5.25% पर स्थिर है। यदि आरबीआई दरों में बढ़ोतरी का फैसला लेता है, तो यह 2025 में चली आ रही राहत भरी नीति का अंत होगा। महंगाई और कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतों के कारण नीतिगत मोर्चे पर दबाव साफ दिख रहा है।
क्यों बंटे हैं एक्सपर्ट्स?
कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि महंगाई को थामने के लिए अक्टूबर में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी जरूरी है, जबकि अन्य का तर्क है कि दिसंबर तक का इंतजार करना बेहतर होगा ताकि लिक्विडिटी और इन्फ्लेशन के आंकड़े और स्पष्ट हो सकें।
निवेशकों पर क्या होगा असर?
ब्याज दरों में कोई भी बदलाव अर्थव्यवस्था के लिए व्यापक मायने रखता है:
- बैंकिंग सेक्टर: ऊंची दरों से बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) को तो फायदा हो सकता है, लेकिन कर्ज महंगा होने से क्रेडिट ग्रोथ की रफ्तार धीमी पड़ने का डर है।
- रियल एस्टेट और ऑटो: ये सेक्टर ब्याज दरों के प्रति बेहद संवेदनशील हैं। लोन महंगे होने से होम बायर्स और कार खरीदारों की ईएमआई (EMI) बढ़ जाएगी, जिससे मांग में गिरावट आ सकती है।
- बॉन्ड मार्केट: दरों में बढ़ोतरी से बॉन्ड यील्ड पर असर पड़ता है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो मौजूदा बॉन्ड्स की कीमतें अक्सर गिर जाती हैं, जो म्यूचुअल फंड्स और संस्थागत निवेशकों के पोर्टफोलियो को प्रभावित करती हैं।
अगले कुछ दिनों में निवेशकों की नजर एमपीसी (MPC) की मीटिंग मिनट्स और बैंकों की कमेंट्री पर होगी। बाजार अब यह देखने के लिए उत्सुक है कि क्या आरबीआई केवल अल्पकालिक सख्ती करेगा या फिर लंबी अवधि के लिए ऊंची ब्याज दरों का दौर शुरू होगा।
