Reserve Bank of India (RBI) ने डिजिटल लोन फ्रॉड को लेकर लोगों को फिर से आगाह किया है। डिजिटल पर्सनल लोन सैंक्शन का आंकड़ा **₹2.99 ट्रिलियन** तक पहुंच गया है, जिसके चलते रेगुलेटर अब 'Key Fact Statements' (KFS) को लेकर बेहद सख्त हो गया है।
डिजिटल कर्ज में उछाल और जालसाजी का जाल
RBI ने साफ तौर पर कहा है कि ऑनलाइन पर्सनल लोन लेते समय सावधानी बरतें। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में डिजिटल लोन सैंक्शन ₹2.99 ट्रिलियन के आंकड़े को पार कर गए हैं। यह रफ्तार जितनी तेजी से बढ़ रही है, फ्रॉड करने वाले भी उतनी ही सक्रियता से नकली ऐप्स के जरिए डेटा चोरी और अवैध वसूली के जाल बुन रहे हैं।
अनुपालन (Compliance) का बढ़ता दबाव
अब बैंकों, NBFCs और फिनटेक पार्टनर्स को कड़ी रेगुलेटरी शर्तों का पालन करना होगा। RBI का 'Key Fact Statement' (KFS) का नियम अनिवार्य है, ताकि उधार लेने वाला व्यक्ति ब्याज दर और अन्य छिपे हुए खर्चों को स्पष्ट रूप से समझ सके। साइबर सिक्योरिटी और कड़े नियमों के कारण इन कंपनियों की ऑपरेटिंग लागत में इजाफा होना तय है।
एसेट क्वालिटी और रिस्क मैनेजमेंट
फ्रॉड से अलग, एक बड़ी चिंता डिफॉल्ट की है। मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार, छोटे टिकट वाले पर्सनल लोन में डिफॉल्ट दर बढ़कर 6.4% हो गई है। यह स्पष्ट संकेत है कि केवल आक्रामक विकास रणनीति से काम नहीं चलेगा; अब उन्हीं कंपनियों का भविष्य सुरक्षित है जो क्रेडिट असेसमेंट और रेगुलेटरी प्रोटोकॉल का मजबूती से पालन करेंगी।
निवेशकों के लिए जरूरी सलाह
निवेशकों को अब कंपनियों के बैलेंस शीट पर नजर रखनी चाहिए कि वे कैसे अनुपालन की लागत को मैनेज कर रही हैं। डिजिटल लेंडर्स की सफलता अब इस पर निर्भर करेगी कि वे लोन ग्रोथ और रिस्क मैनेजमेंट के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं। आरबीआई की नजर अब उन प्लेटफॉर्म्स पर है जो पारदर्शिता के मामले में कमजोर हैं, जबकि अनुपालन वाली कंपनियां इस बाजार में मजबूती से टिकी रहेंगी।
