भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हालिया नीलामी में **₹110 अरब** के लक्ष्य के मुकाबले केवल **₹45.06 अरब** की बोलियां स्वीकार कीं। सिस्टम में मौजूद रिकॉर्ड लिक्विडिटी को सोखने के लिए केंद्रीय बैंक का यह एक सख्त कदम है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित करने के लिए एक सख्त रुख अपना लिया है। हाल ही में हुई पांच साल की बेंचमार्क बॉन्ड नीलामी में आरबीआई ने करीब 60% बोलियों को खारिज कर दिया। बैंक ने केवल ₹45.06 अरब की बोलियां स्वीकार कीं, जो ₹110 अरब के लक्ष्य से काफी कम है।
रिकॉर्ड लिक्विडिटी और चुनौती
सितंबर 2026 की शुरुआत तक बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी सरप्लस करीब ₹11.6 ट्रिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर है। इसका मुख्य कारण डॉलर-रुपया स्वैप सुविधा से आया विदेशी मुद्रा का प्रवाह है। इस अत्यधिक नकदी को सोखने के लिए आरबीआई 'वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो' जैसे साधनों का इस्तेमाल कर रहा है। बॉन्ड बोलियों को रिजेक्ट करके आरबीआई यह सुनिश्चित कर रहा है कि अतिरिक्त नकदी के कारण बॉन्ड यील्ड्स में बहुत ज्यादा गिरावट न आए, जिससे वित्तीय संपत्तियों की कीमत बिगड़ने का डर रहता है।
बाजार पर असर
इस कदम के बाद बाजार ने तुरंत प्रतिक्रिया दी है। पांच साल के बेंचमार्क बॉन्ड की यील्ड 6 बेसिस पॉइंट्स बढ़कर 6.59% पर पहुंच गई। फिक्स्ड-इनकम निवेशकों के लिए यह एक संकेत है कि अगर आरबीआई लिक्विडिटी निकालने के लिए आक्रामक बना रहा, तो शॉर्ट-टर्म इंटरेस्ट रेट्स पर दबाव बना रह सकता है।
आगे की रणनीति
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ कर दिया है कि सिस्टम में संतुलन बनाए रखने के लिए बैंक के पास ओपन मार्केट ऑपरेशंस और स्वैप फैसिलिटीज जैसे तमाम विकल्प मौजूद हैं। अगर लिक्विडिटी कम नहीं हुई, तो बाजार 'कैश रिजर्व रेशियो' (CRR) में बदलाव या बड़े पैमाने पर बॉन्ड बिक्री जैसी और सख्त कार्रवाइयों के लिए तैयार है। आने वाले दिनों में आरबीआई की कमेंट्री और अगली नीलामी के नतीजे निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मॉनिटरेबल रहेंगे।
