Reserve Bank of India (RBI) ने अगस्त महीने में नेट **$43.26 बिलियन** की डॉलर खरीदारी की है। फॉरेन करेंसी स्वैप फैसिलिटी बंद होने के बाद यह एक बड़ा रिकॉर्ड है। साथ ही, फॉरवर्ड मार्केट में सेंट्रल बैंक की नेट शॉर्ट डॉलर पोजीशन बढ़कर **$200.06 बिलियन** के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।
डॉलर की रिकॉर्ड खरीदारी के मायने
अगस्त में RBI की तरफ से की गई $43.26 बिलियन की नेट डॉलर खरीदारी पिछले समय की बिकवाली से बिल्कुल उलट है। इस कदम के पीछे मुख्य वजह फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट (FCNR) डिपॉजिट और एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग्स के लिए कंसेशनल स्वैप फैसिलिटी को समय से पहले बंद करना है। इस फैसले से सिस्टम में मौजूद डॉलर के बड़े प्रवाह को सोखने और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने में मदद मिली है।
फॉरवर्ड मार्केट में रणनीति
सेंट्रल बैंक ने फॉरवर्ड मार्केट में भी अपनी रणनीति को आक्रामक रूप से बदला है। अगस्त के अंत तक, RBI की आउटस्टैंडिंग नेट शॉर्ट डॉलर पोजीशन बढ़कर $200.06 बिलियन हो गई, जो पिछले महीने $136.77 बिलियन थी। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स में दिखी है, जो लगभग दोगुना होकर $176.57 बिलियन तक पहुंच गए हैं। इस कदम से भविष्य की करेंसी एक्सपोजर को मैनेज करने और रुपये को ग्लोबल आर्थिक हलचल से बचाने में मदद मिल रही है।
करेंसी वैल्यूएशन और REER का गणित
निवेशक अब रियल इफेक्टिव एक्सचेंज रेट (REER) पर भी नजर रखे हुए हैं, जो सितंबर में 89.35 पर पहुंच गया है, जो अगस्त में 88.72 था। यह आंकड़ा 100 के बेसलाइन से नीचे है, जिसका मतलब है कि रुपया फिलहाल ओवरवैल्यूड नहीं है। यह ट्रेंड घरेलू और अंतरराष्ट्रीय महंगाई के अंतर को भी दर्शाता है।
बाजार के लिए क्या हैं संकेत?
RBI की ओर से रिजर्व बढ़ाने और फॉरवर्ड बुक मैनेज करने का मकसद ग्लोबल वित्तीय अस्थिरता के खिलाफ एक सुरक्षा कवच तैयार करना है। आने वाली तिमाहियों में घरेलू लिक्विडिटी और रुपये की स्थिरता पर इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है। बाजार अब इस पर नजर रखेगा कि RBI का अगला रुख ब्याज दरों और करेंसी मैनेजमेंट को लेकर क्या रहता है।
