RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक 5-7 अक्टूबर को होने वाली है। रिटेल महंगाई **4.8%** के 20 महीने के उच्च स्तर पर है और क्रूड ऑयल **$100** प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है। दबाव के बावजूद, जानकारों का मानना है कि RBI अभी दरें बढ़ाने के बजाय दिसंबर तक इंतजार कर सकता है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस समय एक बेहद चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है। 5-7 अक्टूबर, 2026 को होने वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक में केंद्रीय बैंक को एक तरफ बढ़ती महंगाई को काबू में करना है, तो दूसरी तरफ आर्थिक विकास की रफ्तार को भी बनाए रखना है। फिलहाल रेपो रेट 5.25% पर है और सवाल यह नहीं है कि दरें बढ़ेंगी या नहीं, बल्कि यह है कि यह सिलसिला कब शुरू होगा।
महंगाई और लिक्विडिटी की चुनौती
वेस्ट एशिया में तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड $100 के स्तर को पार कर गया है, जिसका सीधा असर घरेलू फ्यूल कीमतों और महंगाई दर पर दिख रहा है। इसके अलावा, बैंकिंग सिस्टम में करीब ₹10-11 लाख करोड़ की अतिरिक्त लिक्विडिटी भी एक बड़ी पहेली बनी हुई है, जिसे मैनेज करने के लिए RBI बॉन्ड सेल्स और रिवर्स रेपो ऑक्शन जैसे टूल्स का सहारा ले रहा है। साथ ही, अनियमित मानसून और फसल पैदावार को लेकर चिंताएं भी खाद्य पदार्थों की कीमतों में उबाल ला सकती हैं, जो RBI के लिए और मुश्किल पैदा कर सकता है।
निवेशकों और कर्जदारों पर असर
आम आदमी के लिए इस बैठक का सीधा असर उनके होम, ऑटो और पर्सनल लोन की ईएमआई (EMI) पर पड़ेगा। अगर ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू होता है, तो कर्ज लेना महंगा हो जाएगा। वहीं दूसरी तरफ, बैंकों के लिए यह दौर नेट इंटरेस्ट मार्जिन बढ़ाने का मौका भी साबित हो सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजरें RBI की कमेंट्री पर हैं कि क्या वे इस महंगाई को एक अस्थायी झटका मानते हैं या इसे एक बड़ा खतरा।
