RBI ने फरवरी **2023** के बाद पहली बार रेपो रेट में **25** बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी की है। अब नई दरें **5.50%** हो गई हैं, जिससे त्योहारी सीजन में होम और ऑटो लोन लेना महंगा हो जाएगा।
ब्याज दरों में उछाल और महंगाई का असर
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने 7 अक्टूबर, 2026 को रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स का इजाफा कर इसे 5.50% कर दिया है। यह कदम बढ़ती महंगाई को काबू में रखने के इरादे से उठाया गया है। अगस्त 2026 में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित महंगाई दर 4.8% तक पहुंच गई थी, जिसका मुख्य कारण फूड और फ्यूल की कीमतों में तेजी रही। इसके साथ ही, मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी ने अब 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' (Calibrated Tightening) का रुख अपना लिया है, जिसके संकेत हैं कि आने वाले समय में दरें घटने की उम्मीद कम है।
त्योहारी सीजन और कर्ज का बोझ
यह फैसला ऐसे समय आया है जब भारत में फेस्टिव सीजन जोरों पर है। हालांकि कंपनियां जीरो-कॉस्ट EMI और प्रोसेसिंग फीस में छूट देकर ग्राहकों को लुभाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन बढ़ी हुई दरों के कारण नया कर्ज लेना अब काफी महंगा होगा। फ्लोटिंग रेट पर लोन लेने वालों के लिए EMI का बोझ बढ़ सकता है या लोन की अवधि (Tenure) लंबी हो सकती है।
सेक्टर पर क्या होगा असर?
हाउसिंग और ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टर, जो ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील होते हैं, उन पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है। अगर ग्राहकों ने बड़े खर्चों को टालना शुरू किया, तो इन कंपनियों के रेवेन्यू ग्रोथ पर दबाव बढ़ सकता है।
अर्थव्यवस्था का आउटलुक
एक तरफ जहां RBI ने FY27 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान को बढ़ाकर 7.1% कर दिया है, वहीं दूसरी ओर कड़े क्रेडिट कंडीशंस एक बड़ी चुनौती हैं। निवेशकों की नजर अब मंथली कंजम्पशन डेटा और महंगाई के आंकड़ों पर टिकी है ताकि यह पता चल सके कि त्योहारी जोश और महंगे कर्ज के बीच बाजार कैसा रुख अपनाता है।
