RBI ने महंगाई को कंट्रोल करने के लिए रेपो रेट में **0.25%** की बढ़ोतरी कर दी है, जिससे यह अब **5.50%** पर पहुंच गया है। फाइनेंशियल ईयर **2027** के लिए महंगाई का अनुमान **5.2%** रहने की संभावना है।
RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी ने महंगाई को प्राथमिकता देते हुए रेपो रेट में 0.25% का इजाफा किया है। इस कदम से साफ है कि अब सेंट्रल बैंक 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' (calibrated tightening) की नीति पर चल रहा है ताकि बढ़ती कीमतों को काबू में रखा जा सके।\n\n### महंगाई क्यों बनी चिंता का विषय?\n\nसेंट्रल बैंक के अनुसार, महंगाई अब सिर्फ फूड और फ्यूल तक सीमित नहीं रही है। वर्तमान में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के 37% आइटम्स में महंगाई 4% से ऊपर है, जो इस साल की शुरुआत में केवल 20% थी। वहीं, कोर इन्फ्लेशन (core inflation) भी 4.2% पर पहुंच गई है। इन आंकड़ों के चलते RBI ने फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए इन्फ्लेशन फोरकास्ट को बढ़ाकर 5.2% कर दिया है।\n\n### कमिटी में मतभेद\n\nहालांकि रेट बढ़ाने का फैसला सर्वसम्मति से लिया गया, लेकिन पॉलिसी रुख को सख्त करने पर कमिटी के सदस्य नागेश कुमार और राम सिंह ने असहमति जताई। उनका मानना है कि ग्लोबल ट्रेड अनिश्चितताओं और जियोपॉलिटिकल रिस्क के बीच टाइटनिंग साइकिल को लंबा खींचना प्राइवेट इन्वेस्टमेंट और रियल एस्टेट जैसे कर्ज-आधारित सेक्टर्स के लिए नुकसानदेह हो सकता है।\n\n### ग्रोथ पर नजर\n\nइन्फ्लेशन पर फोकस के बावजूद, RBI देश की इकोनॉमी को लेकर पॉजिटिव है और उसने GDP ग्रोथ का अनुमान 7.1% रखा है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में 7.8% की मजबूत ग्रोथ दर्ज की गई थी। हालांकि, मॉनसून की अनिश्चितता और 'अल नीनो' (El Niño) जैसे क्लाइमेट पैटर्न अभी भी एक बड़ा रिस्क बने हुए हैं। आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस पर होगी कि बैंक लोन की दरों में कितनी बढ़ोतरी करते हैं और इसका असर कॉर्पोरेट प्रॉफिट मार्जिन पर कितना पड़ता है।
