Reserve Bank of India (RBI) ने अब सभी अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों (UCBs) के लिए प्रोफेशनल मैनेजमेंट और एडवांस साइबर-सिक्योरिटी लागू करना अनिवार्य कर दिया है। यह कदम डिजिटल फ्रॉड को रोकने और बैंकिंग सिस्टम को मजबूत बनाने के लिए उठाया गया है।
कड़े हुए नियम, बढ़ेगा भरोसा
नई दिल्ली में आयोजित 'थर्ड कॉन्फ्रेंस ऑफ रजिस्ट्रार्स ऑफ कोऑपरेटिव सोसाइटीज' में RBI ने साफ कर दिया है कि कोऑपरेटिव बैंक अब सिर्फ स्थानीय संस्थान नहीं, बल्कि एक पूरी तरह रेगुलेटेड फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन हैं। RBI के डिप्टी गवर्नर्स, स्वामीनाथन जे. और शिरीष चंद्र मुर्मू ने जोर दिया है कि बैंकों को अपने काम करने के तरीकों में बड़ा बदलाव लाना होगा।
इस बदलाव के मुख्य बिंदु:
- मिशन सक्षम (Mission SAKSHAM): इस पहल के जरिए बैंकों की क्षमता को बढ़ाया जाएगा और बोर्ड में प्रोफेशनल लोगों को शामिल करने पर फोकस होगा।
- IDPIC की सदस्यता: साइबर हमलों और डिजिटल फ्रॉड से निपटने के लिए अब अर्बन कोऑपरेटिव बैंकों को 'इंडियन डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉर्पोरेशन' (IDPIC) की मेंबरशिप लेने की अनुमति दे दी गई है।
- साइबर फ्रॉड पर लगाम: RBI इस बात से चिंतित है कि छोटे बैंकों की डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर कमजोर है, जिससे वे ग्लोबल फ्रॉड नेटवर्क के आसान शिकार बन जाते हैं। खासकर 'मनी-म्यूल' अकाउंट्स पर रोक लगाना आरबीआई की प्राथमिकता है।
खराब बैंकों की होगी छुट्टी
जो बैंक इन नए तकनीकी और गवर्नेंस मानकों पर खरे नहीं उतर पाएंगे, उनके लिए RBI का रुख स्पष्ट है। ऐसे कमजोर संस्थानों को समय रहते बंद (Liquidation) किया जाएगा ताकि इसका असर पूरे बैंकिंग सिस्टम की सेहत पर न पड़े। 'डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन' इस प्रक्रिया में लगा है ताकि ग्राहकों का पैसा सुरक्षित रहे।
यह पूरा रेगुलेटरी बदलाव भारतीय बैंकिंग सिस्टम के निचले स्तर को सुधारने की एक बड़ी कोशिश है। हालांकि ये बैंक स्टॉक मार्केट में लिस्टेड नहीं हैं, लेकिन क्षेत्रीय क्रेडिट मार्केट में इनकी भूमिका बेहद अहम है।
