RBI Liquidity: बैंकिंग सिस्टम से RBI ने खींचे **₹6 लाख करोड़**, रिकॉर्ड सरप्लस से मची हलचल

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
RBI Liquidity: बैंकिंग सिस्टम से RBI ने खींचे **₹6 लाख करोड़**, रिकॉर्ड सरप्लस से मची हलचल

बाजार में बढ़ते कैश सरप्लस को काबू करने के लिए Reserve Bank of India (RBI) ने बड़ा कदम उठाया है। बैंकिंग सिस्टम से **₹6 लाख करोड़** से ज्यादा की लिक्विडिटी को सोख लिया गया है, ताकि बढ़ती महंगाई के जोखिम को कम किया जा सके।

बाजार में रिकॉर्ड लिक्विडिटी का दबाव

7 सितंबर 2026 को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने लिक्विडिटी मैनेजमेंट के लिए एक बड़ा ऑपरेशन शुरू किया। इसका मुख्य कारण 6 सितंबर को सिस्टम में दर्ज किया गया ₹11.6 लाख करोड़ का अब तक का सबसे बड़ा कैश सरप्लस है। विदेशी मुद्रा के भारी इनफ्लो (लगभग $136.4 बिलियन) के कारण सिस्टम में कैश की भरमार हो गई है, जिसे मैनेज करना केंद्रीय बैंक के लिए चुनौती बना हुआ है।

लिक्विडिटी कम करने के लिए दो टूल्स का इस्तेमाल

RBI ने इस अतिरिक्त कैश को सिस्टम से हटाने के लिए मुख्य रूप से दो तरीके अपनाए:

  • ओवरनाइट ऑक्शन: इसके जरिए ₹3.53 लाख करोड़ सिस्टम से बाहर किए गए।
  • VRRR फैसिलिटी: 30-दिन वाले वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) ऑक्शन के जरिए ₹2.59 लाख करोड़ सोखे गए।

हालांकि, ₹7 लाख करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले बैंकों ने लंबे समय के लिए पैसा लॉक करने में कम रुचि दिखाई, जिससे पता चलता है कि बैंक शॉर्ट-टर्म में कैश की उपलब्धता बनाए रखना चाहते हैं।

निवेशकों के लिए आगे का रास्ता

अगर लिक्विडिटी का यह सरप्लस इसी तरह बना रहा, तो RBI भविष्य में Market Stabilization Scheme (MSS) बॉन्ड्स या Sell-Buy Swaps जैसे सख्त टूल्स का सहारा ले सकता है। निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह देखना होगा कि आने वाले ऑक्शन में बैंकों का पार्टिसिपेशन कैसा रहता है, क्योंकि लिक्विडिटी बहुत ज्यादा टाइट होने से इकोनॉमिक ग्रोथ पर भी असर पड़ सकता है। फिलहाल, RBI का पूरा फोकस महंगाई को कंट्रोल करने और बाजार में स्थिरता बनाए रखने पर है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.