RBI ने बैंक और NBFCs के लिए लोन की ब्याज दरों को तय करने के नए नियम जारी किए हैं। पारदर्शी लोन स्ट्रक्चर के लिए आए ये नियम **2027** से लागू हो सकते हैं, जिससे बैंकों के मार्जिन पर सीधा असर पड़ सकता है।
RBI ने 'Interest Rates on Loans and Advances Directions, 2026' का ड्राफ्ट जारी कर लोन मार्केट में बड़ा बदलाव करने का संकेत दिया है। इस नए नियम का मुख्य मकसद कर्ज लेने वाले ग्राहकों को ज्यादा स्पष्टता देना है। अब सभी कमर्शियल बैंकों, NBFCs और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों को ब्याज दरें तय करने के लिए एक मानक ढांचा अपनाना होगा।
क्या बदलेगा नियमों से?
प्रस्तावित नियमों के तहत, लोन की ब्याज दरें अब दो हिस्सों में बांटी जाएंगी: बेंचमार्क रेट और स्प्रेड। हर ग्राहक को यह पता होगा कि बैंक उनसे कितना एक्स्ट्रा चार्ज (स्प्रेड) वसूल रहा है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि लोन देने के बाद 3 साल तक बैंक 'नॉन-क्रेडिट रिस्क' स्प्रेड को नहीं बढ़ा पाएंगे। वर्तमान में बैंकों के पास अपनीPricing पॉलिसी बदलने की काफी छूट होती है, जिसे अब रेगुलेटर सीमित करना चाहता है।
निवेशकों के लिए संकेत
शेयर बाजार और निवेशकों के लिए यह खबर काफी अहम है। बैंकों की प्राइसिंग फ्लेक्सिबिलिटी पर रोक लगने से उनके नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर दबाव दिख सकता है। कंपनियों को अपने सिस्टम को अपडेट करने के लिए अतिरिक्त ऑपरेशनल कॉस्ट भी उठानी पड़ सकती है।
डेडलाइन और टाइमलाइन
RBI ने इन नियमों को 1 अप्रैल, 2027 से लागू करने का प्रस्ताव रखा है। पुराने लोन के लिए ग्राहकों को 1 अप्रैल, 2029 तक नए ढांचे में शिफ्ट होने का विकल्प मिलेगा। साथ ही, फ्लोटिंग रेट लोन के लिए बेंचमार्क रिसेट पीरियड को अधिकतम 3 महीने तक सीमित करने का प्रस्ताव है, ताकि ब्याज दरों में बदलाव का लाभ ग्राहकों तक तुरंत पहुंच सके। फिलहाल मार्केट की नजर इस बात पर है कि बैंक और NBFCs इस ड्राफ्ट पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
