RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की बैठक जारी है। जानकारों का मानना है कि महंगाई को काबू में करने के लिए RBI रेपो रेट में **25 बेसिस पॉइंट्स** की बढ़ोतरी कर इसे **5.50%** कर सकता है।
महंगाई पर लगाम की कोशिश
7 अक्टूबर 2026 को खत्म होने वाली तीन दिवसीय MPC मीटिंग पर सबकी नजरें टिकी हैं। अगर RBI रेपो रेट को बढ़ाकर 5.50% करता है, तो यह फरवरी 2023 के बाद पहली बार होगा। दरअसल, अगस्त में खुदरा महंगाई दर 4.82% पर पहुंच गई थी, जो RBI के 4% के लक्ष्य से कहीं ज्यादा है। इसके अलावा, क्रूड ऑयल की कीमतें $107 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जिसने RBI के पास सख्त कदम उठाने के अलावा कोई विकल्प नहीं छोड़ा है।
आपकी जेब पर असर
आम आदमी के लिए इसका सीधा असर लोन पर पड़ेगा। यदि आप होम, ऑटो या पर्सनल लोन ले रखा है, तो आपकी EMI बढ़ना तय है। हालांकि, जो लोग बैंक में पैसा जमा रखते हैं, उनके लिए अच्छी खबर है। बैंक लिक्विडिटी मैनेज करने के लिए अपनी बचत खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं, जिसका फायदा कंजर्वेटिव निवेशकों को मिलेगा।
कॉर्पोरेट इंडिया और बैंकिंग सेक्टर
मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट जैसे कैपिटल-इंटेंसिव सेक्टर की कंपनियां अब महंगे लोन से जूझेंगी, जिससे उनके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आ सकता है। वहीं, बैंकिंग स्टॉक्स के लिए यह स्थिति मिश्रित है। ब्याज दरें बढ़ने से बैंकों के Net Interest Margins (NIM) में सुधार हो सकता है, लेकिन लोन डिफॉल्ट होने का रिस्क भी बढ़ जाता है।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह केवल शुरुआत है। 2027 फाइनेंशियल ईयर के अंत तक रेपो रेट 5.75% से 6.25% के बीच पहुंच सकता है। भविष्य के फैसले पूरी तरह से महंगाई के आंकड़ों और ग्लोबल जियो-पॉलिटिकल हालातों पर निर्भर करेंगे।
