RBI का बैंकों को कड़ा फरमान: शिकायतों में भारी उछाल के बाद बदलेगा ग्रीवेंस सिस्टम

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
RBI का बैंकों को कड़ा फरमान: शिकायतों में भारी उछाल के बाद बदलेगा ग्रीवेंस सिस्टम

RBI ने बैंकों को अपनी शिकायत निवारण प्रणाली (Grievance Redressal System) को पूरी तरह से दुरुस्त करने का आदेश दिया है। फाइनेंशियल ईयर 2025 में शिकायतों में **13.55%** का उछाल दर्ज किया गया है, जिसके बाद अब बैंकों को इंटरनल ऑडिट और गवर्नेंस पर ज्यादा ध्यान देना होगा।

शिकायतों का बढ़ता आंकड़ा

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने देश के सभी कमर्शियल बैंकों के लिए एक कड़ा निर्देश जारी किया है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि शिकायतों के निपटारे में बैंक लापरवाही बरत रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 2025 में कुल 13.3 लाख शिकायतें दर्ज की गई हैं, जो पिछले साल के मुकाबले 13.55% अधिक है। अब बैंकों को केवल शिकायत बंद नहीं करनी होगी, बल्कि यह भी बताना होगा कि समस्या की जड़ (root-cause) क्या थी।

कहाँ सबसे ज्यादा दिक्कत?

RBI के डेटा के अनुसार, कुल शिकायतों में से 29.25% मामले लोन और एडवांस से जुड़े थे, जबकि क्रेडिट कार्ड से जुड़ी शिकायतें 20.04% रहीं। कुल शिकायतों में बैंकों की हिस्सेदारी 81.53% है, जिसमें प्राइवेट बैंकों का हिस्सा 37.53% और पब्लिक सेक्टर बैंकों का हिस्सा 34.80% रहा है।

RBI का नया मास्टर प्लान: RB-IOS 2026

यह निर्देश 1 जुलाई 2026 से प्रभावी 'रिजर्व बैंक – इंटीग्रेटेड ओम्बड्समैन स्कीम' (RB-IOS) के तहत आया है। अब ओम्बड्समैन के पास भी पावर बढ़ गई है। अगर बैंक स्तर पर गलती पाई जाती है, तो ओम्बड्समैन ₹30 लाख तक का हर्जाना नुकसान के लिए और ₹3 लाख तक का हर्जाना मानसिक परेशानी के लिए दे सकता है।

निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?

निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि बैंकों को अब कस्टमर सपोर्ट और टेक्नोलॉजी पर अपना खर्च बढ़ाना होगा। यह बैंकों के ऑपरेशनल खर्च को बढ़ा सकता है। आने वाले समय में बैंक बोर्ड की जवाबदेही बढ़ेगी और मैनेजमेंट की कमेंट्री में 'ऑपरेशनल एफिशिएंसी' पर निवेशकों की नजर होनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.