RBI के नए Export Declaration Form (EDF) नियमों के लागू होने के बाद फ्रीलांसर्स और सर्विस एक्सपोर्टर्स भारी कन्फ्यूजन में हैं। 90 में से केवल 2 बैंकों ने ही स्पष्ट गाइडलाइन्स जारी की हैं, जिससे पेमेंट्स मिलने में देरी का खतरा बढ़ गया है।
बैंकों के अपने अलग नियम
Reserve Bank of India (RBI) द्वारा नए Export Declaration Form (EDF) सिस्टम को लागू हुए 3 हफ्ते बीत चुके हैं, लेकिन सर्विस एक्सपोर्टर्स और फ्रीलांसर्स अभी भी अंधेरे में हैं। इस बदलाव का मकसद विदेशी मुद्रा डेटा को स्ट्रीमलाइन करना था, लेकिन असल में यह एक बड़ी अव्यवस्था में बदल गया है। हर बैंक अपनी मर्जी से नियमों की व्याख्या कर रहा है, जिससे प्रोफेशनल्स के लिए बड़ी दिक्कतें पैदा हो गई हैं।
पारदर्शिता की कमी
समस्या की जड़ स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का न होना है। Foreign Exchange Dealers’ Association of India (FEDAI) के डेटा पर गौर करें, तो स्थिति चिंताजनक है। देश के 90 रजिस्टर्ड बैंकों में से महज 2 ने ही ग्राहकों के लिए स्पष्ट गाइडलाइन्स जारी की हैं। बाकी बैंकों में हर कर्मचारी के अपने अलग नियम हैं, जिससे एक्सपोर्टर्स को भारी प्रशासनिक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। कुछ बैंक मामूली ट्रांजेक्शन के लिए भी मल्टी-पेज फाइलिंग की मांग कर रहे हैं।
क्या है आगे का रास्ता?
RBI गवर्नर ने अक्टूबर में संकेत दिया था कि पर्सनल ट्रांजेक्शन करने वाले इंडिविजुअल्स को कुछ नियमों से छूट मिल सकती है, लेकिन यह अभी तक जमीनी स्तर पर नहीं पहुंचा है। बैंक फिलहाल रिस्क लेने से बच रहे हैं और सख्त अनुपालन की राह पर चल रहे हैं। उम्मीद है कि अगले 2 हफ्तों में आरबीआई इस पर FAQ जारी करेगा, जिससे पर्सनल रेमिटेंस और प्रोफेशनल एक्सपोर्ट्स के बीच का यह कन्फ्यूजन दूर हो सकेगा। तब तक फ्रीलांसर्स को पेमेंट्स के लिए इस कागजी उलझन से गुजरना ही होगा।
