RBI का बड़ा दांव: नेट शॉर्ट फॉरवर्ड पोजीशन रिकॉर्ड **$200 बिलियन** पर पहुंची

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AuthorMehul Desai|Published at:
RBI का बड़ा दांव: नेट शॉर्ट फॉरवर्ड पोजीशन रिकॉर्ड **$200 बिलियन** पर पहुंची

RBI ने रुपए में आ रही गिरावट को थामने के लिए कमर कस ली है। अगस्त महीने में रिजर्व बैंक की नेट शॉर्ट फॉरवर्ड पोजीशन रिकॉर्ड **$200 बिलियन** के स्तर पर पहुंच गई है, जो जुलाई में **$136 बिलियन** थी।

RBI की क्या है रणनीति?

रुपए की वैल्यू को फिजिकल फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व खर्च किए बिना मैनेज करने के लिए RBI फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स का इस्तेमाल कर रहा है। इसमें सेंट्रल बैंक फॉरवर्ड मार्केट में डॉलर बेचता है और स्पॉट मार्केट में डॉलर खरीदता है। इस $200 बिलियन के आंकड़े का मतलब है कि RBI लिक्विडिटी को सोखने और करेंसी में भारी उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए बड़े स्तर पर काम कर रहा है।

इकोनॉमी पर असर

यह कदम रुपए पर बढ़ते दबाव का नतीजा है। हालांकि, इससे करेंसी स्टेबल बनी रहती है, लेकिन RBI पर भविष्य की देनदारियां भी बढ़ रही हैं। एक स्थिर रुपया देश के लिए बहुत जरूरी है, क्योंकि यह क्रूड ऑयल और अन्य कमोडिटी के इंपोर्ट कॉस्ट को कंट्रोल करता है, जो सीधे तौर पर महंगाई को प्रभावित करता है।

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

इक्विटी और डेट इन्वेस्टर्स के लिए यह एक महत्वपूर्ण इंडिकेटर है। आने वाले महीनों में देखना होगा कि RBI इन कॉन्ट्रैक्ट्स को कैसे रोल ओवर (Roll over) करता है, क्योंकि इसका सीधा असर बैंकिंग सिस्टम की लिक्विडिटी पर पड़ेगा। जिन कंपनियों पर डॉलर-डिनॉमिनेटेड कर्ज ज्यादा है या जो भारी इंपोर्ट पर निर्भर हैं, उनके मुनाफे के मार्जिन पर रुपए की स्थिरता का गहरा असर पड़ता रहेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.