RBI की बड़ी उपलब्धि: रिकॉर्ड $136 बिलियन का Forex Inflow, रुपया हुआ मजबूत

RBI
Whalesbook Logo
AuthorMehul Desai|Published at:
RBI की बड़ी उपलब्धि: रिकॉर्ड $136 बिलियन का Forex Inflow, रुपया हुआ मजबूत

भारत ने रिकॉर्ड $136.4 बिलियन का विदेशी मुद्रा प्रवाह (forex inflows) हासिल किया है, जिसका बड़ा हिस्सा FCNR(B) डिपॉजिट से आया है। इस भारी निवेश ने रुपये को सहारा दिया है और बैंकिंग सिस्टम में नकदी का अंबार लगा दिया है।

रिकॉर्ड तोड़ निवेश से बढ़ा विदेशी भंडार

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी स्पेशल फॉरेक्स स्वैप सुविधा को सफलतापूर्वक पूरा करते हुए $136.4 बिलियन की पूंजी जुटाई है। यह आंकड़ा बाजार के तमाम अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए वैश्विक वित्तीय प्रणाली के भरोसे को दर्शाता है। इस पहल का मुख्य हिस्सा, जो कि Foreign Currency Non-Resident (FCNR) बैंक डिपॉजिट्स से जुड़ा था, 31 अगस्त 2026 को बंद हो गया।

कुल प्रवाह में से $127.2 बिलियन अकेले FCNR(B) डिपॉजिट से आए हैं, जबकि बाकी राशि बाहरी कमर्शियल उधार और अन्य विदेशी मुद्रा ऋणों से प्राप्त हुई है। इस भारी भरकम पूंजी के कारण भारतीय रुपया 10-सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जो बाहरी झटकों के खिलाफ एक मजबूत कवच का काम कर रहा है।

लिक्विडिटी का बढ़ता दबाव और RBI की रणनीति

इस भारी आवक का सीधा असर डोमेस्टिक बैंकिंग लिक्विडिटी पर पड़ा है, जो फिलहाल ₹6 ट्रिलियन से लेकर ₹9.7 ट्रिलियन के सरप्लस स्तर पर है। हालांकि यह लिक्विडिटी क्रेडिट ग्रोथ को बढ़ावा देती है, लेकिन जरूरत से ज्यादा नकदी महंगाई और ब्याज दरों के मैनेजमेंट को मुश्किल बना सकती है।

इसे काबू में रखने के लिए RBI आने वाले समय में वेरिएबल रिवर्स रेपो रेट या इंक्रीमेंटल कैश रिजर्व रेशियो जैसे औजारों का इस्तेमाल कर सकता है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि त्योहारी सीजन से पहले सेंट्रल बैंक सिस्टम से अतिरिक्त नकदी को कैसे सोखता है।

भविष्य की राह: स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स पर टिकी निगाहें

एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह कामयाबी एक 'टैक्टिकल' जीत है, न कि कोई स्थायी समाधान। क्योंकि यह एक डिपॉजिट आधारित प्रवाह है, इसलिए भविष्य में इन राशियों को ब्याज सहित वापस भी करना होगा। साथ ही, भारत और अमेरिका के बीच ब्याज दरों का मामूली अंतर (150 से 175 बेसिस पॉइंट्स) अभी भी भारतीय संपत्तियों के आकर्षण के लिए एक चुनौती बना हुआ है।

अब बाजार का ध्यान टैक्स और रेगुलेटरी ढांचे में बड़े बदलावों की ओर शिफ्ट हो गया है। निवेशक यह उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार के रिफॉर्म्स के जरिए भारतीय सरकारी बॉन्ड्स को वैश्विक इंडेक्स में शामिल करने का रास्ता साफ होगा, जिससे लंबी अवधि का निवेश भारत में बना रहे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.