रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बैंकों और फाइनेंशियल संस्थानों के लिए REIT और InvIT यूनिट्स की वैल्युएशन को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। नए नियमों के मुताबिक, अब इन एसेट्स को मार्केट प्राइस या नेट एसेट वैल्यू (NAV) पर ही दर्ज करना होगा।
वैल्युएशन में पारदर्शिता की कोशिश
RBI के इस नए सर्कुलर का मकसद बैंकिंग सेक्टर में चल रही अनिश्चितता को खत्म करना है। अब तक कई संस्थानों के पास वैल्युएशन के अलग-अलग तरीके थे, जिससे बैलेंस शीट में स्पष्टता की कमी रहती थी। अब नियम साफ हैं: जो यूनिट्स एक्सचेंज पर ट्रेड होती हैं, उनकी वैल्युएशन 'मार्केट प्राइस' पर होगी और जो अनकोटेड (Unquoted) हैं, उन्हें 'नेट एसेट वैल्यू' (NAV) के आधार पर कैलकुलेट किया जाएगा। यह कदम सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के डिस्क्लोजर मानकों के अनुरूप है।
न मानने पर '₹1' की पेनाल्टी
अगर कोई बैंक ऐसे यूनिट्स होल्ड करता है जो बहुत कम ट्रेड होते हैं या फिर जिनका NAV डेटा उपलब्ध नहीं है, तो उसे भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। रेगुलेटर ने साफ कहा है कि ऐसी स्थिति में एसेट को केवल ₹1 की नाममात्र वैल्यू पर दर्ज करना होगा। यह कदम बैंकों को मजबूर करेगा कि वे अपने पास मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट निवेश का सटीक डेटा रखें।
क्या रिटेल निवेशकों को डरने की जरूरत है?
अगर आप खुद शेयर बाजार के जरिए REIT या InvIT में निवेश करते हैं, तो आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। यह नियम सिर्फ बैंकों और फाइनेंशियल संस्थानों की बैलेंस शीट के लिए है। बाजार में इन यूनिट्स की कीमत डिमांड और सप्लाई के हिसाब से ही तय होती रहेगी। भविष्य में बैंकिंग शेयरों पर नजर रखने वाले निवेशकों को अब कंपनियों के तिमाही नतीजों के दौरान एसेट वैल्युएशन में होने वाले बदलावों को बारीकी से देखना होगा।
