RBI ने NBFC Account Aggregators के लिए इंटरऑपरेबिलिटी का नया नियम लागू कर दिया है, जिससे ग्राहक अब किसी भी प्लेटफॉर्म से अपना फाइनेंशियल डेटा आसानी से शेयर कर सकेंगे। इस बदलाव की डेडलाइन **31 दिसंबर, 2026** तय की गई है, जिसके चलते CAMS जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेयर्स के शेयरों में तेजी देखी गई है।
फाइनेंशियल इकोसिस्टम में बड़ा बदलाव
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 7 अक्टूबर, 2026 को एक महत्वपूर्ण रेगुलेटरी अपडेट जारी किया है। अब NBFC-AAs के बीच इंटरऑपरेबिलिटी को अनिवार्य कर दिया गया है। जिस तरह UPI के जरिए आप किसी भी ऐप से पेमेंट कर सकते हैं, अब उसी तरह ग्राहक किसी भी लाइसेंस प्राप्त एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म का उपयोग करके अपना फाइनेंशियल डेटा कहीं भी शेयर कर सकेंगे। यह नियम डेटा साइलो को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
Consolidated Account Statements (CAS) का दायरा बढ़ा
नियामक ने Consolidated Account Statements (CAS) की उपयोगिता का विस्तार करते हुए इसमें बैंक डिपॉजिट डेटा को भी शामिल करने का फैसला किया है। अब रिटेल इन्वेस्टर्स को अपने निवेश और कैश सेविंग का एक ही जगह पर एकीकृत विवरण मिल सकेगा। जिन निवेशकों के पास डीमैट अकाउंट नहीं है, उनके लिए अकाउंट एग्रीगेटर इकोसिस्टम ही कंसोलिडेटेड रिपोर्टिंग का मुख्य जरिया बना रहेगा।
मार्केट और इंफ्रास्ट्रक्चर पर असर
इस डिजिटल बैकएंड को सपोर्ट करने वाली इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों को इस बदलाव से सीधा फायदा होने की उम्मीद है। नतीजों का असर मार्केट पर तुरंत दिखा: CAMS के शेयर में 1.5% की तेजी दर्ज की गई, जबकि Pine Labs जैसे अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेयर्स में भी 3.4% तक का उछाल देखा गया।
सुरक्षा पर RBI का फोकस
सुविधा के साथ-साथ RBI ने डेटा प्राइवेसी और साइबर सुरक्षा मानकों को और कड़ा कर दिया है। अकाउंट एग्रीगेटर नेटवर्क के बढ़ने के साथ-साथ सिस्टम की तकनीकी मजबूती अनिवार्य होगी। मार्केट पार्टिसिपेंट्स को साल के अंत तक इन तकनीकी अपग्रेड्स को पूरा करना होगा। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि वित्तीय संस्थान इस इंटीग्रेशन को कितनी तेजी से लागू करते हैं, क्योंकि यही इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर्स की मार्जिन और ऑपरेशनल एफिशिएंसी को भविष्य में तय करेगा।
