RBI ने सभी Account Aggregator प्लेटफॉर्म्स को इंटरऑपरेबिलिटी (Interoperability) अपनाने का आदेश दिया है। इस बदलाव से अलग-थलग चल रहे फाइनेंशियल इकोसिस्टम का दौर खत्म होगा और डेटा शेयरिंग बेहद आसान हो जाएगी।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल फाइनेंस सेक्टर में एक बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव करते हुए सभी Account Aggregator (AA) प्लेटफॉर्म्स के लिए इंटरऑपरेबिलिटी को अनिवार्य कर दिया है। साल 2021 में लॉन्च हुए AA फ्रेमवर्क के जरिए लोग अब तक सुरक्षित रूप से अपना फाइनेंशियल डेटा, जैसे बैंक स्टेटमेंट और इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो, लेंडर्स के साथ शेयर करते रहे हैं। लेकिन अब तक ये प्लेटफॉर्म्स अलग-अलग सिस्टम के तौर पर काम कर रहे थे। अब इस नए नियम से हर बैंक और एग्रीगेटर के बीच अलग से एग्रीमेंट करने की जरूरत खत्म होगी और पूरा नेटवर्क एक साथ जुड़ जाएगा।
डिजिटल लेंडिंग इकोसिस्टम का विस्तार
यह कदम डिजिटल लेंडिंग में आ रही दिक्कतों को कम करने के लिए उठाया गया है। फाइनेंशियल ईयर 2026 के अंत तक, Account Aggregator नेटवर्क ने करीब ₹3.82 लाख करोड़ के लोन वितरण में मदद की है। वर्तमान में 17 रजिस्टर्ड एग्रीगेटर और लगभग 1,000 फाइनेंशियल संस्थाएं इस नेटवर्क का हिस्सा हैं। अब इस इकोसिस्टम को एक स्टैंडर्ड और यूनिवर्सल कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल की जरूरत थी, जिससे लोन अप्रूवल की गति बढ़ेगी और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन का समय कम होगा।
कॉम्पिटिशन और इनोवेशन पर असर
फिनटेक कंपनियों और बैंकों के लिए अब किसी एक प्लेटफॉर्म से बंधे रहने का रिस्क खत्म हो गया है। पहले संस्थाएं मौजूदा इंटीग्रेशन सेटअप के कारण किसी खास एग्रीगेटर को चुनती थीं, लेकिन इंटरऑपरेबिलिटी आने से अब सभी को सर्विस क्वालिटी और टेक्नोलॉजी के आधार पर मुकाबला करना होगा। इससे मार्केट में कॉम्पिटिशन बढ़ेगा और इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा, हालांकि जो छोटी कंपनियां केवल अपने यूजर बेस पर निर्भर थीं, उन पर दबाव बढ़ सकता है।
सुरक्षा और चुनौतियां
जहां यह इंटीग्रेशन तेज क्रेडिट फ्लो का वादा करता है, वहीं डेटा सिक्योरिटी और प्राइवेसी पर फोकस करना अब कंपनियों की प्राथमिकता होगी। इंडस्ट्री के लिए बिना किसी सर्विस रुकावट के इस ट्रांजिशन को मैनेज करना एक बड़ी चुनौती है। निवेशकों और मार्केट एक्सपर्ट्स की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनियां कितनी जल्दी अपने टेक्निकल सिस्टम को इन नए नियमों के अनुरूप अपडेट करती हैं और इसका डिजिटल लेंडिंग सेक्टर पर क्या असर पड़ता है।
