रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए सभी बैंक डिपॉजिट को कंसोलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट (CAS) में शामिल करने का निर्देश दिया है। यह नई व्यवस्था **31 दिसंबर 2026** तक लागू हो जाएगी, जिससे निवेशकों को अपनी कुल वेल्थ का एक ही जगह ब्यौरा मिल सकेगा।
अब एक ही डैशबोर्ड पर दिखेगा सारा पैसा
अब तक रिटेल निवेशकों को अपने निवेश को ट्रैक करने के लिए अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर निर्भर रहना पड़ता था। स्टॉक्स और म्यूचुअल फंड्स के लिए जहां डीमैट स्टेटमेंट का इस्तेमाल होता था, वहीं सेविंग्स और फिक्स्ड डिपॉजिट के लिए बैंक एप्स की जरूरत पड़ती थी। RBI के इस नए निर्देश के बाद, CAS अब सिर्फ सिक्योरिटीज तक सीमित न रहकर एक 'फाइनेंशियल डैशबोर्ड' में बदल जाएगा। इससे निवेशकों को अपनी पूरी वेल्थ का आकलन करना बेहद आसान हो जाएगा, साथ ही पुरानी या सुप्त (dormant) पड़ी डिपॉजिट्स और नॉमिनी की जानकारी भी एक क्लिक पर मिल सकेगी।
अकाउंट एग्रीगेटर की भूमिका
यह पूरी प्रक्रिया 'अकाउंट एग्रीगेटर' (AA) फ्रेमवर्क पर आधारित होगी। RBI ने NBFC-अकाउंट एग्रीगेटर्स के बीच इंटरऑपरेबिलिटी को अनिवार्य कर दिया है। इसका सीधा फायदा यह होगा कि निवेशक अपनी पसंद के किसी भी एग्रीगेटर को चुनकर अलग-अलग बैंक और डिपॉजिटरी के डेटा को एक साथ देख पाएंगे। यह सिस्टम पूरी तरह से 'कंसेंट-बेस्ड' (consent-based) होगा, यानी आपकी मंजूरी के बिना कोई भी डेटा साझा नहीं किया जा सकेगा।
चुनौतियां और सुरक्षा
हालांकि यह बदलाव निवेशकों के लिए काफी फायदेमंद है, लेकिन इसके पीछे कुछ तकनीकी चुनौतियां भी हैं। साल के अंत तक बैंकों और डिपॉजिटरीज के बीच डेटा इंटीग्रेशन का काम पूरा करना एक बड़ी जिम्मेदारी है। डेटा की सुरक्षा और प्राइवेसी सुनिश्चित करने के लिए RBI सख्त प्रोटोकॉल पर काम कर रहा है। अभी यह स्पष्ट होना बाकी है कि किन खास डिपॉजिट्स (जैसे सेविंग्स vs आरडी) को इस स्टेटमेंट का हिस्सा बनाया जाएगा। फिलहाल मार्केट पार्टिसिपेंट्स इस पर रेगुलेटर के अगले विस्तृत सर्कुलर का इंतजार कर रहे हैं।
