रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी कंट्रोल करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। 16 अक्टूबर 2026 से बैंकों को डेली कैश रिजर्व रेशियो (CRR) की **99%** लिमिट को अनिवार्य रूप से मेंटेन करना होगा, जिससे सिस्टम से लगभग **₹4 लाख करोड़** की अतिरिक्त लिक्विडिटी को सोखा जा सके।
लिक्विडिटी मैनेजमेंट में सख्त हुआ RBI
अब तक बैंक CRR मेंटेन करने के लिए 90% के नियम का पालन करते थे, लेकिन अब RBI ने इसे 99% कर दिया है। इसका मतलब है कि बैंकों को हर दिन अपने पास मौजूद कैश का लगभग पूरा हिस्सा रेगुलेटरी नियमों के मुताबिक रखना होगा। हालाँकि, CRR की बेस रेट 3% पर बरकरार है, लेकिन बैंकों की 'फ्लेक्सिबिलिटी' अब खत्म कर दी गई है।
क्यों लिया गया यह कड़ा फैसला?
RBI का यह कदम बैंकिंग सिस्टम में बढ़ी हुई लिक्विडिटी को बैलेंस करने के लिए है। रिपोर्ट्स के अनुसार, जून से अगस्त 2026 के बीच विदेशी निवेश (Foreign Inflows) में भारी उछाल आया, जो $133 बिलियन तक पहुँच गया था। इस सरप्लस कैश की वजह से सिस्टम में करीब ₹4 लाख करोड़ की अतिरिक्त लिक्विडिटी हो गई थी, जिसे नियंत्रित करना अब RBI की प्राथमिकता है।
बैंकों के ऑपरेशन्स पर क्या होगा प्रभाव?
इस नियम के लागू होने के बाद बैंकों के ट्रेजरी डिपार्टमेंट पर दबाव बढ़ेगा। पहले जो बैंक दो हफ्तों के दौरान कैश बैलेंस को एडजस्ट कर लेते थे, अब उन्हें रोजाना कड़ी निगरानी रखनी होगी। निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि यह ब्याज दरों (Interest Rates) में बदलाव नहीं, बल्कि एक ऑपरेशनल बदलाव है। आने वाले समय में मनी मार्केट रेट्स में हलचल देखी जा सकती है, जिस पर बैंकों के अगले अर्निंग कॉल्स में चर्चा होने की उम्मीद है।
