भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की तीन दिवसीय बैठक आज से शुरू हो गई है। अगस्त में महंगाई दर के **4.82%** पर रहने के कारण, बाजार के जानकारों का मानना है कि रेपो रेट में **0.25%** की बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे यह **5.50%** तक पहुंच सकता है।
महंगाई पर लगाम लगाने की तैयारी
महंगाई के आंकड़ों ने RBI के लिए चिंता बढ़ा दी है। अगस्त 2026 में रिटेल इन्फ्लेशन (CPI) 4.82% दर्ज की गई, जो RBI के 4% के कंफर्ट लेवल से काफी ऊपर है। लगातार तीन महीनों से महंगाई का लक्ष्य से ऊपर रहना यह संकेत दे रहा है कि सेंट्रल बैंक को सख्त कदम उठाने होंगे। रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI कमर्शियल बैंकों को पैसा उधार देता है। इसे बढ़ाकर अर्थव्यवस्था में नकदी के फ्लो को कम करने की कोशिश की जाएगी, ताकि बढ़ती कीमतों को नियंत्रित किया जा सके।
आम आदमी और निवेशकों पर असर
ज्यादातर इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि रेपो रेट को मौजूदा 5.25% से बढ़ाकर 5.50% किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो बैंक अपने लोन की ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं। इसका सीधा असर होम लोन, पर्सनल लोन और व्हीकल लोन लेने वालों पर पड़ेगा, जिससे उनकी EMI या लोन की अवधि (Tenure) बढ़ सकती है।
शेयर बाजार के निवेशकों के लिए यह बैठक काफी महत्वपूर्ण है। बैंकिंग, हाउसिंग और ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टर, जो कर्ज पर निर्भर हैं, इस फैसले से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। जब लोन महंगा होता है, तो घर और गाड़ियों की मांग सुस्त पड़ सकती है, जिसका असर इन सेक्टर की कंपनियों के शेयरों पर दिख सकता है।
ग्लोबल माहौल और RBI की रणनीति
RBI केवल घरेलू आंकड़ों पर ही नजर नहीं रख रहा, बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिति को भी ध्यान में रखा जा रहा है। दुनिया भर के प्रमुख सेंट्रल बैंक महंगाई से निपटने के लिए सख्त मॉनेटरी पॉलिसी अपना रहे हैं। 7 अक्टूबर को आने वाला RBI का फैसला न केवल ब्याज दरों को तय करेगा, बल्कि आने वाले समय के लिए महंगाई और आर्थिक विकास पर बैंक का रुख भी साफ कर देगा, जिस पर निवेशकों की पैनी नजर बनी रहेगी।
