रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की तीन दिवसीय बैठक आज से शुरू हो रही है। बढ़ती महंगाई के बीच बाजार में **25 बेसिस पॉइंट** की रेपो रेट बढ़ोतरी की चर्चा तेज है, जिससे दरें **5.50%** तक पहुँच सकती हैं।
महंगाई के मोर्चे पर मिल रहे चुनौतीपूर्ण आंकड़ों के बीच रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की MPC बैठक आज, 5 अक्टूबर 2026 से शुरू हो रही है। इस बैठक में ब्याज दरों की दिशा तय करने को लेकर मंथन होगा। अभी रेपो रेट 5.25% पर है और जानकारों का मानना है कि 7 अक्टूबर को आने वाले फैसले में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की जा सकती है।
क्यों बढ़ रहा है दबाव?
अगस्त महीने के आंकड़े चिंताजनक हैं। कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) 4.82% पर पहुंच गया है, जो RBI के 4% के लक्ष्य से ऊपर है। वहीं, होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) में 9.92% की उछाल दिखी है। इसमें फ्यूल और पावर सेक्टर का बड़ा हाथ है, जहां महंगाई 22.93% तक जा पहुंची है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, जो सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही हैं।
इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले रुपया 96.00-96.40 के स्तर के आसपास ट्रेड कर रहा है। अमेरिका और भारत के बीच ब्याज दरों के अंतर में कमी आने से विदेशी पूंजी के बाहर जाने का रिस्क भी बढ़ गया है, जो RBI के लिए एक बड़ी चुनौती है।
निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
ब्याज दरों में इजाफा होने का सबसे सीधा असर बैंकिंग, रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर पर पड़ेगा। लोन महंगे होने से कंज्यूमर डिमांड पर दबाव आ सकता है और कंपनियों के मार्जिन घट सकते हैं। हालांकि, महंगाई को काबू करने के लिए यह कदम उठाना आरबीआई की मजबूरी हो सकता है। निवेशक अब 7 अक्टूबर को आने वाले आधिकारिक बयान का इंतजार कर रहे हैं, जिससे यह साफ होगा कि भविष्य में लिक्विडिटी और ग्रोथ को लेकर आरबीआई का रुख क्या है।
