RBI MPC Meet: महंगाई की मार! क्या फिर बढ़ेगी Repo Rate? आज से शुरू हो रही बैठक

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
RBI MPC Meet: महंगाई की मार! क्या फिर बढ़ेगी Repo Rate? आज से शुरू हो रही बैठक

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक आज से शुरू हो रही है। अगस्त में महंगाई दर के **4.82%** पर पहुंचने और रुपये पर दबाव के बीच, बाजार की नजरें **5.25%** की मौजूदा रेपो रेट पर टिकी हैं कि क्या इसे और बढ़ाया जाएगा।

भारतीय रिजर्व बैंक की MPC आज से अपनी तीन दिवसीय बैठक शुरू कर रही है। 7 अक्टूबर को आने वाले फैसले पर सबकी निगाहें हैं, क्योंकि आरबीआई को एक तरफ बढ़ती घरेलू महंगाई को काबू में रखना है, तो दूसरी तरफ आर्थिक विकास की रफ्तार को भी बनाए रखना है।

महंगाई और रुपये का दबाव

मौजूदा रेपो रेट 5.25% है। महंगाई बढ़ने के पीछे सबसे बड़ी वजह खुदरा महंगाई का 20 महीने के उच्च स्तर 4.82% पर पहुंचना है। इसके अलावा, ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार जाने से आयात महंगा हो गया है, जिससे रुपये पर भी दबाव बना हुआ है। कुछ इकोनॉमिस्ट का मानना है कि महंगाई को रोकने के लिए 75 बेसिस पॉइंट की कुल बढ़ोतरी जरूरी हो सकती है, जिसकी शुरुआत 50 बेसिस पॉइंट के इजाफे के साथ की जा सकती है।

मार्केट की राय और चुनौतियां

बाजार के जानकारों का नजरिया थोड़ा संभला हुआ है। हालांकि बॉन्ड यील्ड और अमेरिका के ट्रेजरी के बीच का अंतर कम हो रहा है, लेकिन कई एनालिस्ट्स को उम्मीद है कि आरबीआई या तो 25 बेसिस पॉइंट की मामूली बढ़ोतरी करेगा या फिर फिलहाल दरों को स्थिर रखेगा। आरबीआई के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह दरों को ऐसे स्तर पर रखे जिससे महंगाई भी रुके और त्योहारी सीजन में बनी उपभोक्ता मांग (Consumer Demand) भी प्रभावित न हो।

आम आदमी और सेक्टर पर असर

अगर आरबीआई रेपो रेट बढ़ाता है, तो कमर्शियल बैंक भी अपने लेंडिंग रेट्स बढ़ा सकते हैं, जिसका सीधा असर होम लोन, ऑटो और पर्सनल लोन की ईएमआई (EMI) पर पड़ेगा। रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टर, जो ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील होते हैं, उन पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं, बैंकिंग सेक्टर के लिए यह मिश्रित संकेत है; ऊंची दरों से बैंकों का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) तो सुधर सकता है, लेकिन अगर कर्ज महंगा हुआ, तो क्रेडिट ग्रोथ धीमी होने का डर भी बना रहता है।

निवेशकों के लिए क्या है जरूरी?

7 अक्टूबर को सिर्फ रेट का फैसला ही काफी नहीं होगा। आरबीआई गवर्नर का बयान और महंगाई-ग्रोथ को लेकर आरबीआई का आउटलुक (Guidance) बाजार की दिशा तय करेगा। अगर आरबीआई का रुख 'हॉकिश' रहता है, तो बॉन्ड मार्केट और ब्याज-संवेदनशील शेयरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.