रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम से अतिरिक्त नकदी को सोखने के लिए कमर कस ली है। इस कदम से ओवरनाइट कॉल मनी रेट्स बढ़कर 5.43% हो गए हैं।
बाजार में नकदी कम करने की रणनीति
केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% करने के बाद अब लिक्विडिटी को नियंत्रित करने पर पूरा जोर दिया है। 16 अक्टूबर, 2026 से शुरू होने वाले पखवाड़े (fortnight) से बैंकों को अपनी Cash Reserve Ratio (CRR) आवश्यकताओं का 99% दैनिक आधार पर मेंटेन करना होगा। इसके अलावा, 13 अक्टूबर, 2026 को ₹25,000 करोड़ के सरकारी सिक्योरिटीज की बिक्री भी की जाएगी।
इन उपायों का सीधा मकसद बैंकों के पास मौजूद अतिरिक्त कैश को सिस्टम से बाहर निकालना है, ताकि हालिया रेपो रेट बढ़ोतरी का असर ग्राहकों तक जल्दी पहुंचे। अब तक, बैंकों ने अपने पास मौजूद सरप्लस के कारण ग्राहकों के लिए लोन की दरें उतनी तेजी से नहीं बढ़ाई थीं, लेकिन अब यह लचीलापन खत्म होता दिख रहा है।
कर्जदारों और निवेशकों पर असर
बैंकों की फंड जुटाने की लागत अब बढ़ने वाली है, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा। होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन लेने वालों के लिए आने वाले समय में EMI का बोझ बढ़ना लगभग तय है।
बॉन्ड मार्केट में भी हलचल देखी जा रही है। ₹25,000 करोड़ की सरकारी सिक्योरिटीज़ की बिक्री से बाजार में सप्लाई बढ़ेगी, जिसका असर बॉन्ड यील्ड्स पर दिख सकता है। वहीं, बैंक स्टॉक्स में निवेश करने वालों को अब थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि फंड की लागत बढ़ने से बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन पर दबाव बन सकता है।
