Reserve Bank of India (RBI) ने गिरते रुपये को संभालने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। **12 अक्टूबर** से तेल कंपनियों के लिए सीधे डॉलर खरीदने की सुविधा दी गई है, ताकि बाजार की अस्थिरता को कम किया जा सके और सट्टेबाजी पर लगाम लगाई जा सके।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डॉलर के मुकाबले रुपये में आ रही बड़ी गिरावट को रोकने के लिए कमर कस ली है। फिलहाल रुपया 96.7 से 97 के स्तर के करीब ट्रेड कर रहा है। बाजार में भारी उतार-चढ़ाव को देखते हुए सेंट्रल बैंक ने 12 अक्टूबर, 2026 से प्रभावी होने वाले कई सख्त नियम पेश किए हैं।
तेल कंपनियों के लिए 'स्पेशल विंडो'
इस रणनीति का सबसे अहम हिस्सा सरकारी तेल कंपनियों यानी Indian Oil Corporation (IOC), Hindustan Petroleum Corporation (HPCL) और Bharat Petroleum Corporation (BPCL) के लिए एक विशेष डॉलर विंडो बनाना है। ये कंपनियां कच्चे तेल के आयात के लिए खुले बाजार से बड़ी मात्रा में डॉलर खरीदती थीं। अब ये कंपनियां अपनी जरूरत का डॉलर सीधे RBI से ले सकेंगी, जिससे खुले बाजार में डॉलर की डिमांड कम होगी और रुपये पर दबाव घटेगा।
करेंसी डेरिवेटिव्स पर लगाम
RBI का फोकस अब सट्टेबाजी (Speculative activity) को पूरी तरह खत्म करने पर है। इसके लिए:
- हेजिंग लिमिट: बिना किसी प्रूफ के हेजिंग करने की सीमा को $100 मिलियन से घटाकर सीधे $5 मिलियन कर दिया गया है।
- कॉन्ट्रैक्ट्स पर सख्ती: कैंसिल हुए फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स को फिर से बुक करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
- कैश रिजर्व: $2 मिलियन से अधिक के कुछ रुपये-लिंक्ड डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए बैंकों को अब 20% कैश रिजर्व रखना अनिवार्य होगा।
निवेशकों और कंपनियों पर असर
यह फैसला ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए राहत भरा है क्योंकि उन्हें अब करेंसी फ्लक्चुएशन की चिंता कम होगी। हालांकि, ऑटोमोटिव, इलेक्ट्रॉनिक्स और केमिकल सेक्टर की कंपनियां, जो आयात पर निर्भर हैं, उनके लिए हेजिंग करना अब थोड़ा महंगा और जटिल हो सकता है। बाजार में लिक्विडिटी कम हो सकती है और निवेशक अब RBI के फॉरेक्स रिजर्व के आंकड़ों पर नजर रखेंगे, जो अक्टूबर की शुरुआत में लगभग $734 बिलियन थे।
