भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 1 जनवरी 2027 से लागू होने वाले नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसके तहत, बैंक और NBFC अब EMI न चुकाने की स्थिति में कर्जदारों के डिवाइस (जैसे स्मार्टफोन) को रिमोटली लॉक नहीं कर पाएंगे। यह नियम कर्ज वसूली के तरीकों को सीमित करेगा और कंपनियों को अपनी रणनीति बदलनी होगी।
कर्ज वसूली के तरीकों में बड़ा बदलाव
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने कर्ज वसूली के लिए टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को लेकर बड़े नियम बदले हैं। 1 जनवरी 2027 से, कर्ज देने वाली कंपनियां (लेंडर्स) ईएमआई (EMI) की चूक के मामले में कर्जदारों के स्मार्टफोन, टैबलेट या लैपटॉप जैसे डिवाइसेस को रिमोट सॉफ्टवेयर के जरिए लॉक नहीं कर सकेंगी। यह एक आम तरीका था जिसे कई नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (NBFCs) और फिनटेक कंपनियां इस्तेमाल करती थीं, खासकर कंज्यूमर ड्यूरेबल फाइनेंसिंग के क्षेत्र में।
नए नियम क्या कहते हैं?
नए नियमों के अनुसार, सामान्य पर्सनल लोन, कार लोन या होम लोन के लिए इस तरह के लॉकिंग टूल का इस्तेमाल पूरी तरह से प्रतिबंधित होगा। अगर डिवाइस ही लोन का फाइनेंस किया गया एसेट है, तो भी लॉकिंग की अनुमति एक खास और चरणबद्ध समय-सीमा के तहत ही होगी।
- 30 दिन तक की देरी: अगर पेमेंट में 30 दिन से कम की देरी है, तो कोई भी डिवाइस प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकेगा।
- 30 से 60 दिन की देरी: इस अवधि में केवल आंशिक प्रतिबंध (partial restrictions) लगाए जा सकते हैं।
- 60 दिन से ज्यादा की देरी: पूरी तरह से डिवाइस लॉक केवल तभी किया जा सकेगा जब लोन 60 दिनों से ज्यादा बकाया हो।
इसके अलावा, कॉल, SMS और इमरजेंसी सेवाओं जैसी जरूरी फंक्शनलिटीज हर समय चालू रहनी चाहिए। लेंडर्स को यूजर के पर्सनल डेटा, जैसे फोटो, कॉन्टैक्ट्स और लोकेशन हिस्ट्री तक पहुंचने की भी सख्त मनाही है। इन बदलावों से कर्ज वसूली का वह ऑटोमेटेड टूल खत्म हो जाएगा जिस पर कई कंपनियां निर्भर थीं।
अनुपालन और जोखिम (Compliance and Risks)
नए नियमों के तहत, लेंडर्स को पेमेंट मिलने के एक घंटे के भीतर डिवाइस को अनलॉक करना होगा। ऐसा न करने पर, कर्जदार को प्रति घंटे ₹250 का मुआवजा देना होगा, जिसकी अधिकतम सीमा लोन की कुल राशि तक हो सकती है।
इससे पेमेंट गेटवे और डिवाइस-मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर के बीच रियल-टाइम इंटीग्रेशन की जरूरत बढ़ेगी। कंपनियों को अपने टेक्नोलॉजी सिस्टम को अपग्रेड करना पड़ सकता है। नियमों का पालन न करने या गलत तरीके से डिवाइस लॉक करने पर कंपनियों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है और रेगुलेटरी जांच का सामना करना पड़ सकता है।
यह नियम उन कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण है जो छोटे टिकट वाले कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन पर ज्यादा निर्भर हैं। उन्हें अपने रिस्क असेसमेंट मॉडल पर फिर से विचार करना पड़ सकता है, जिसका असर आने वाली तिमाहियों में उनके प्रॉफिट मार्जिन और रिकवरी एफिशिएंसी पर पड़ सकता है।
