भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) 6 अगस्त को अपनी ब्याज दर पर फैसला सुनाएगी। बाजार और आम लोगों की नजरें इस पर टिकी हैं, क्योंकि उम्मीद यही है कि रेपो रेट **6.5%** पर ही बना रहेगा। इसका मतलब है कि होम लोन की EMI में फिलहाल कोई बड़ी राहत मिलने की उम्मीद कम है।
ब्याज दरों पर RBI का अगला कदम
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) 6 अगस्त को अपनी ब्याज दरों पर अहम फैसला सुनाएगी। बाजार के जानकारों और आम लोगों को इस फैसले का बेसब्री से इंतजार है। ज्यादातर एनालिस्ट्स का मानना है कि RBI, रेपो रेट को मौजूदा 6.5% पर ही स्थिर रखेगा। आपको बता दें कि फरवरी 2023 से RBI इसी दर पर ब्याज दरें बनाए हुए है, ताकि महंगाई को काबू में रखते हुए आर्थिक विकास को भी सहारा दिया जा सके।
होम लोन और EMI पर क्या होगा असर?
रेपो रेट में स्थिरता का सीधा असर होम लोन पर पड़ेगा। ज्यादातर बैंक होम लोन के लिए एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट (EBLR) का इस्तेमाल करते हैं, जो सीधे रेपो रेट से जुड़ा होता है। इसलिए, अगर रेपो रेट 6.5% पर ही बना रहता है, तो होम लोन लेने वालों को अपनी EMI में कोई कमी आने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। हालांकि, होम बायर्स उम्मीद कर रहे थे कि ब्याज दरें कम होंगी, लेकिन RBI का मुख्य फोकस अभी भी महंगाई को 4% के लक्ष्य के करीब लाने पर है।
महंगाई और ग्लोबल इकोनॉमी का गणित
MPC के फैसले को कई फैक्टर प्रभावित करेंगे। हाल के दिनों में महंगाई में कुछ कमी आई है, लेकिन यह अभी भी RBI के लिए एक बड़ी चिंता बनी हुई है। इसके अलावा, RBI को कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और दुनिया के दूसरे बड़े केंद्रीय बैंकों की नीतियों जैसे ग्लोबल इकोनॉमी के अनिश्चित माहौल से भी निपटना है। ऐसे में, एक स्थिर या सतर्क रुख अपनाना भारतीय अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने में मदद करेगा, भले ही इससे ब्याज दरों में कटौती का इंतजार थोड़ा लंबा हो जाए।
इंडस्ट्री का नजरिया
हालांकि ब्याज दरों में कटौती से रियल एस्टेट जैसे सेक्टरों में मांग बढ़ सकती है, लेकिन इंडस्ट्री के बड़े नाम यह भी मानते हैं कि स्थिरता भी उतनी ही जरूरी है। लगातार एक जैसी ब्याज दरें घर खरीदारों को बिना किसी अचानक बढ़ोतरी के डर के अपनी प्लानिंग करने में मदद करती हैं। अब सबकी निगाहें RBI गवर्नर के भाषण पर होंगी, जिसमें वे ग्रोथ और महंगाई को लेकर आगे की रणनीति पर रोशनी डालेंगे। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि RBI कब अपनी पॉलिसी को नरम करने पर विचार कर सकता है।
