रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की अगली बैठक 5 अगस्त 2026 को होनी है, और उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक बेंचमार्क रेपो रेट को **5.25%** पर अपरिवर्तित रखेगा। निवेशक महंगाई, आर्थिक विकास के अनुमानों और भू-राजनीतिक तनावों के कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ने वाले असर पर खास नजर रखेंगे।
ब्याज दरों पर क्या रहेगा RBI का रुख?
RBI की MPC मीटिंग 5 अगस्त 2026 को होने वाली है। ज्यादातर फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि RBI अपने प्रमुख रेपो रेट में कोई फेरबदल नहीं करेगा और इसे 5.25% पर ही बनाए रखेगा। केंद्रीय बैंक का फोकस घरेलू विकास को बनाए रखते हुए वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच स्थिरता पर रहेगा।
महंगाई और GDP ग्रोथ का गणित
MPC की बैठक में महंगाई (Inflation) और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) ग्रोथ पर RBI के नए अनुमानों पर सभी की नजरें होंगी। RBI ने पहले वित्त वर्ष 2027 के लिए महंगाई दर 5.1% रहने का अनुमान जताया था। घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है, लेकिन पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव RBI को सतर्क रहने पर मजबूर कर सकता है। फिलहाल ब्रेंट क्रूड ऑयल $84 प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है, हालांकि कुछ अर्थशास्त्रियों ने वित्त वर्ष 2027 के लिए इसका अनुमान $85 से $90 प्रति बैरल तक बढ़ा दिया है। ग्रोथ की बात करें तो, RBI वित्त वर्ष 2027 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.6% पर बरकरार रख सकता है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के एक हालिया अनुमान के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में ग्रोथ लगभग 7% रह सकती है।
विदेशी मुद्रा प्रवाह (Forex Inflows)
निवेशक इस बात पर भी ध्यान देंगे कि RBI विदेशी पूंजी प्रवाह (Foreign Capital Flows) पर क्या कहता है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Currency Reserves) को मजबूत करने के RBI के प्रयास सफल रहे हैं। जुलाई 2026 के अंत तक, फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक) डिपॉजिट $60 बिलियन से अधिक हो गए हैं, जो जून की शुरुआत में $32.56 बिलियन थे। SBI ने इस इनफ्लो में लगभग $4.12 बिलियन का योगदान दिया है। इस लिक्विडिटी सपोर्ट से RBI को बाहरी दबावों को संभालने में अतिरिक्त लचीलापन मिल सकता है।
आगे की राह (Future Policy Path)
हालांकि इस मीटिंग में ब्याज दरों में कटौती या बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं है, लेकिन भविष्य में मॉनेटरी पॉलिसी की दिशा क्या होगी, इस पर बाजार में बहस जारी है। RBI के आगे के फैसले इस बात पर निर्भर करेंगे कि ऊर्जा की लागत से जुड़ी महंगाई का जोखिम कितना बढ़ता है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं तो RBI आने वाले महीनों में दरों में बढ़ोतरी पर विचार कर सकता है। वहीं, कुछ का मानना है कि RBI अमेरिकी फेडरल रिजर्व जैसे अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों के संकेतों का इंतजार करेगा। निवेशक RBI के मीटिंग के बाद आने वाले आधिकारिक बयान पर नजर रखेंगे, जिसमें भू-राजनीतिक जोखिमों और इस वित्त वर्ष की बाकी अवधि के लिए ब्याज दर की दिशा पर उनके प्रभाव का आकलन किया जा सकता है।
