बैंकिंग सिस्टम में जमा अतिरिक्त नकदी को कम करने के लिए Reserve Bank of India ने बड़ा कदम उठाया है। RBI ने **₹6 लाख करोड़** की वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी शुरू की है, क्योंकि सिस्टम में **₹3.4 लाख करोड़** से ज्यादा का सरप्लस मौजूद है।
भारी सरप्लस के पीछे की वजह
अगस्त 2026 में बैंकिंग सिस्टम में औसतन ₹3.4 लाख करोड़ से ज्यादा की अतिरिक्त नकदी बनी हुई है। इसका मुख्य कारण देश में विदेशी पूंजी का जबरदस्त प्रवाह है। 21 अगस्त 2026 तक, भारत में स्पेशल USD-INR स्वैप विंडो के जरिए $72.85 बिलियन का निवेश आया है, जिसमें से $65.4 बिलियन अकेले FCNR(B) डिपॉजिट से आए हैं। इससे फॉरेक्स रिजर्व तो मजबूत हुआ है, लेकिन बैंकों के पास नकदी का अंबार लग गया है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
बैंकों के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण स्थिति है क्योंकि अतिरिक्त कैश होने के बावजूद उन्हें मुनाफे वाले लोन के अवसर कम मिल रहे हैं, जिसका सीधा असर उनके नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) पर पड़ रहा है। RBI 5.25% के रेपो रेट में बदलाव किए बिना ही रिवर्स रेपो के जरिए मार्केट से लिक्विडिटी सोख रहा है ताकि मनी मार्केट की दरों को स्थिर रखा जा सके।
आगे का रास्ता
यह कदम बिना रेट हाइक किए लिक्विडिटी मैनेजमेंट का एक जरिया है, लेकिन बॉन्ड मार्केट पर इसके असर की बारीकी से नजर रखी जा रही है। अगर यह नीलामी आगे भी जारी रहती है, तो यह महंगाई पर लगाम लगाने के RBI के इरादे को साफ करेगा। निवेशकों को अब अगली मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) मीटिंग और लिक्विडिटी डेटा पर नजर रखनी चाहिए, जो बैंकों के प्रॉफिटेबिलिटी आउटलुक को स्पष्ट करेंगे।
