Rupee vs Dollar: रुपया लुढ़ककर **95.56** के करीब, RBI ने थामी गिरावट

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AuthorAditya Rao|Published at:
Rupee vs Dollar: रुपया लुढ़ककर **95.56** के करीब, RBI ने थामी गिरावट

डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया **95.56** के स्तर तक गिर गया है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने के संकेतों के बीच RBI बाजार में सक्रिय हो गया है।

सोमवार, 31 अगस्त 2026 को भारतीय रुपया भारी दबाव में दिखा। रुपये में जारी तेज गिरावट को रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हस्तक्षेप किया है। केंद्रीय बैंक स्पॉट मार्केट में डॉलर की बिकवाली और लिक्विडिटी स्वैप का सहारा ले रहा है ताकि बाजार में अत्यधिक अस्थिरता (volatility) न आए।

क्यों दबाव में है रुपया?

रुपये की इस कमजोरी के पीछे दो बड़े ग्लोबल कारण हैं:

  1. कच्चे तेल की आग: भू-राजनीतिक तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल $90 से $91 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, जिससे तेल कंपनियों की डॉलर डिमांड बढ़ गई है और रुपये पर दबाव बना है।
  2. मजबूत डॉलर: डॉलर इंडेक्स (DXY) 99.62 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के हालिया बयानों ने बाजार में हलचल मचा दी है। निवेशकों का मानना है कि सितंबर की बैठक में फेड ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है, जिसकी संभावना 55% से 60% तक आंकी गई है।

RBI की रणनीति

RBI सरकारी बैंकों के जरिए डॉलर बेच रहा है और लिक्विडिटी को बैलेंस करने के लिए शॉर्ट-टर्म डॉलर-रुपया स्वैप का इस्तेमाल कर रहा है। इसका मकसद बैंकिंग सिस्टम में तनाव को कम करना है ताकि रुपये की सुरक्षा के साथ-साथ फाइनेंशियल स्टेबिलिटी बनी रहे।

निवेशकों पर क्या असर?

रुपये के कमजोर होने से आयात महंगा हो जाता है, जिससे देश में फ्यूल और रॉ मटेरियल के चलते महंगाई बढ़ने का रिस्क है। यदि सितंबर में फेडरल रिजर्व ब्याज दरें बढ़ाता है, तो बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर भी इसका असर दिख सकता है। निवेशकों के लिए अब क्रूड ऑयल के दाम और RBI के अगले कदमों पर नजर रखना बेहद जरूरी हो गया है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.