RBI का बड़ा कदम: बैंकिंग सिस्टम में आई ₹81,590 करोड़ की नकदी, कॉल रेट्स में आई स्थिरता

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
RBI का बड़ा कदम: बैंकिंग सिस्टम में आई ₹81,590 करोड़ की नकदी, कॉल रेट्स में आई स्थिरता
Overview

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम में ₹81,590 करोड़ की नकदी डाली है ताकि लिक्विडिटी की कमी को दूर किया जा सके। यह कदम ऐसे समय में आया है जब बैंकिंग सिस्टम के कैश सरप्लस में भारी गिरावट आई थी, जिससे ओवरनाइट कॉल रेट्स में उछाल आया था। RBI ने तीन-दिन की वेरिएबल रेट रेपो (VRR) ऑक्शन के ज़रिए यह नकदी दी, जो शॉर्ट-टर्म कैश ज़रूरतों के सक्रिय प्रबंधन का संकेत है।

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RBI की लिक्विडिटी को लेकर बड़ी कार्रवाई

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को तीन-दिवसीय वेरिएबल रेट रेपो (VRR) ऑक्शन के माध्यम से बैंकिंग सिस्टम में ₹81,590 करोड़ की नकदी डाली। इस कदम का सीधा मक़सद सिस्टम में आई लिक्विडिटी सरप्लस की बड़ी कमी को दूर करना है, जिसके कारण ओवरनाइट कॉल मनी रेट्स में इज़ाफ़ा हुआ था। VRR ऑक्शन वह ज़रिया है जिसका इस्तेमाल सेंट्रल बैंक वित्तीय क्षेत्र में अस्थायी कैश फ्लो की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए करता है। यह राशि 5.26% के कट-ऑफ रेट पर दी गई। गौर करने वाली बात यह है कि सिस्टम में नकदी की तंगी के बावजूद, ऑक्शन में ₹1 ट्रिलियन की पेशकश के मुकाबले मांग कम देखी गई।

बैंकिंग सिस्टम का सरप्लस घटा, कॉल रेट्स में उछाल

21 मई को बैंकिंग सिस्टम का लिक्विडिटी सरप्लस घटकर करीब ₹58,876.29 करोड़ रह गया, जो 20 मई को ₹1.51 ट्रिलियन था। सरप्लस कैश में यह भारी कमी ओवरनाइट कॉल मनी रेट्स में उछाल का मुख्य कारण बनी। विश्लेषकों का मानना है कि RBI को वित्तीय बाज़ारों को स्थिर रखने और रेट्स में और उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए और VRR ऑक्शन की आवश्यकता पड़ सकती है। सेंट्रल बैंक की यह कार्रवाई बाज़ार के सुचारू कामकाज और अल्पकालिक कैश की दिक्कतों को दूर करने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

बाज़ार का नज़रिया और आगे की राह

हालांकि RBI की लिक्विडिटी मैनेजमेंट पर तत्काल ध्यान केंद्रित है, वहीं व्यापक बाज़ार में क्रेडिट की मांग जारी है। VRR ऑक्शन में उम्मीद से कम मांग, नकदी की तंगी के बावजूद, यह संकेत दे सकती है कि बैंक सावधानी बरत रहे हैं या उन्होंने अपनी तत्काल फंडिंग ज़रूरतों का गलत अंदाज़ा लगाया है। RBI की भविष्य में बदलती लिक्विडिटी की स्थितियों का सटीक आकलन करने और प्रतिक्रिया देने की क्षमता महत्वपूर्ण होगी। यदि सरप्लस में गिरावट जारी रहती है, तो आगे और नकदी डाली जा सकती है या अन्य लिक्विडिटी टूल्स का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसका अल्पकालिक ब्याज दरों और क्रेडिट उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.