कोर लिक्विडिटी एडजस्टमेंट
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आज से 5 दिन के लिए ₹1.5 लाख करोड़ का वेरिएबल रेट रेपो (VRR) ऑपरेशन चला रहा है। इसका मकसद भारतीय बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी (तरलता) में आई कमी को दूर करना है। हालांकि सोमवार को सिस्टम में ₹1.82 लाख करोड़ का सरप्लस (अधिकता) था, लेकिन केंद्रीय बैंक के इस कदम से पता चलता है कि मार्केट रेट्स को कंट्रोल करने की जरूरत है। वेटेड एवरेज कॉल रेट (WACR) 5.18% से बढ़कर 5.21% हो गया है, जो कि 5.25% के पॉलिसी रेपो रेट के करीब है। VRR ऑक्शन के जरिए बैंक सरकारी सिक्योरिटीज (Government Securities) के बदले शॉर्ट-टर्म फंडिंग (Short-Term Funding) ले सकते हैं।
मॉनेटरी पॉलिसी अलाइनमेंट
RBI, लिक्विडिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी (LAF) कॉरिडोर के भीतर ओवरनाइट कॉल रेट्स को बनाए रखने के लिए रेपो और रिवर्स रेपो ऑपरेशंस का इस्तेमाल करता है। यह कॉरिडोर स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट से तय होता है। इन ऑपरेशंस को कंडक्ट करके, RBI यह सुनिश्चित करता है कि WACR पॉलिसी रेपो रेट के करीब रहे, जो कि मॉनेटरी कंडीशंस (Monetary Conditions) को मैनेज करने का RBI का मुख्य टूल है।
मार्केट इंटरवेंशन की तुलना
₹1.5 लाख करोड़ का यह इंजेक्शन RBI के शॉर्ट-टर्म इंटरेस्ट रेट वोलेटिलिटी (Short-Term Interest Rate Volatility) को मैनेज करने के प्रयासों को दर्शाता है। हालांकि अलग-अलग मार्केट स्ट्रक्चर (Market Structures) के कारण सेंट्रल बैंक्स के लिक्विडिटी टूल्स (Liquidity Tools) की तुलना करना मुश्किल है, लेकिन RBI का ओपन मार्केट ऑपरेशंस (Open Market Operations) का इस्तेमाल ग्लोबल प्रैक्टिसेज (Global Practices) के अनुरूप है। RBI का WACR को एक टाइट बैंड (Tight Band) में रखने पर फोकस, प्रेडिक्टेबल मॉनेटरी पॉलिसी ट्रांसमिशन (Predictable Monetary Policy Transmission) का लक्ष्य रखता है। अन्य उभरते बाजार (Emerging Markets) रिजर्व रिक्वायरमेंट्स (Reserve Requirements) का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन VRR एक अधिक मार्केट-बेस्ड अप्रोच (Market-Based Approach) प्रदान करता है।
एनालिटिकल व्यू
RBI का यह VRR ऑक्शन कंडक्ट करने का फैसला, मौजूदा सरप्लस के बावजूद, लिक्विडिटी को लेकर एक प्रो-एक्टिव अप्रोच (Pro-Active Approach) दिखाता है। WACR में मामूली वृद्धि ने संभवतः RBI को फंड इंजेक्ट करने के लिए प्रेरित किया, ताकि शॉर्ट-टर्म रेट्स पर और दबाव बढ़ने से रोका जा सके। इस कदम का उद्देश्य बैंकों के लिए उधार लेने की लागत को स्थिर करना, उन्हें मॉनेटरी पॉलिसी के अनुरूप लाना और क्रेडिट फ्लो (Credit Flow) का समर्थन करना है। ऑक्शन का साइज यह बताता है कि लिक्विडिटी बैलेंस (Liquidity Balance) को बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण एडजस्टमेंट (Adjustment) की आवश्यकता है।
जोखिम कारक और आर्थिक संदर्भ
जबकि RBI के लिक्विडिटी ऑपरेशंस फाइनेंशियल सिस्टम (Financial System) को स्थिर करते हैं, आर्थिक कारक उनकी प्रभावशीलता को प्रभावित कर सकते हैं। ग्लोबल इन्फ्लेशन (Global Inflation) या फॉरेन एक्सचेंज आउटफ्लो (Foreign Exchange Outflows) लिक्विडिटी की मांग बढ़ा सकते हैं, जिसके लिए अधिक इंटरवेंशंस (Interventions) की आवश्यकता होगी। भारत की क्रेडिट ग्रोथ रेट (Credit Growth Rate) भी लिक्विडिटी को प्रभावित करती है। तेज क्रेडिट विस्तार से लिक्विडिटी पर दबाव पड़ सकता है, जबकि मंदी से अतिरिक्त सरप्लस हो सकता है। RBI को फाइनेंशियल स्टेबिलिटी (Financial Stability) बनाए रखने और ग्रोथ का समर्थन करने के लिए इन डायनामिक्स (Dynamics) की निगरानी करनी होगी।
