RBI बाजार को सहारा देने के लिए ₹1.5 लाख करोड़ की लिक्विडिटी डालेगा
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सोमवार, 25 मई को ₹1.50 लाख करोड़ की वेरिएबल रेट रेपो (VRR) नीलामी की घोषणा की है। इस एक्शन का उद्देश्य बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी डालना है, ताकि हाल के दिनों में सरप्लस फंड में आई कमी और बढ़ी हुई ओवरनाइट कॉल मनी रेट्स को कंट्रोल किया जा सके। केंद्रीय बैंक का यह कदम पहले किए गए लिक्विडिटी मैनेजमेंट ऑपरेशंस के बाद आया है।
लिक्विडिटी की तंगी को समझना
सिस्टम की लिक्विडिटी टाइट हो गई है, अनुमान है कि ₹58,876.29 करोड़ का डेफिसिट (कमी) है। पिछले चार दिनों में यह कमी तेज हुई है, जिससे सरप्लस ₹1.90 लाख करोड़ कम हो गया है। इसका बड़ा कारण गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) कलेक्शन से हुआ आउटफ्लो है। फंड की कमी के चलते ओवरनाइट कॉल मनी रेट्स RBI के पॉलिसी रेपो रेट 5.25% से ऊपर चले गए थे, जो शॉर्ट-टर्म फंडिंग मार्केट्स में तनाव का संकेत है।
RBI के हस्तक्षेप पर बाजार की प्रतिक्रिया
यह लिक्विडिटी इंजेक्शन पिछले शुक्रवार को तीन दिन की VRR नीलामी के जरिए डाले गए ₹81,590 करोड़ के समान है। वेरिएबल रेट रेपो ऑक्शन RBI के लिए लिक्विडिटी को ठीक करने और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी सुनिश्चित करने का एक अहम जरिया है। बाजार इस नवीनतम इंजेक्शन के प्रभाव और इंटरबैंक लेंडिंग रेट्स पर इसके असर पर बारीकी से नजर रखेगा। ऐतिहासिक रूप से, ऐसे इंटरवेंशन से ओवरनाइट रेट्स रेपो रेट की ओर वापस आते हैं।
फाइनेंशियल सेक्टर पर असर
हालांकि दी गई जानकारी में किसी खास बैंकिंग स्टॉक का जिक्र नहीं है, लेकिन बड़े पैमाने पर लिक्विडिटी इंजेक्शन से आमतौर पर फाइनेंशियल सेक्टर को फायदा होता है। शॉर्ट-टर्म फंडिंग पर ज्यादा निर्भर रहने वाले बैंकों को तुरंत राहत मिल सकती है, जिससे उनके नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) को स्थिर करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, लगातार टाइट लिक्विडिटी की स्थिति अंडरलाइंग इकोनॉमिक स्ट्रेस का संकेत दे सकती है, जिसका असर लेंडिंग ग्रोथ और एसेट क्वालिटी पर पड़ सकता है। अन्य केंद्रीय बैंक भी डोमेस्टिक लिक्विडिटी को मैनेज करने के लिए इसी तरह के VRR ऑपरेशन का उपयोग करते हैं, और उनकी सफलता मार्केट रेट्स को पॉलिसी टारगेट्स के अनुरूप लाने की उनकी क्षमता से मापी जाती है।
