RBI की चाल: ब्याज दरें जस की तस, शेयर बाजार में बिकवाली का दौर!

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AuthorNeha Patil|Published at:
RBI की चाल: ब्याज दरें जस की तस, शेयर बाजार में बिकवाली का दौर!
Overview

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने आज अपने फैसलों में प्रमुख रेपो रेट को **5.25%** पर अपरिवर्तित रखा है और 'न्यूट्रल' पॉलिसी का रुख बरकरार रखा है। उम्मीद के मुताबिक फैसले के बावजूद, बाजार में मायूसी छाई रही और सेंसेक्स **350** अंकों से ज्यादा लुढ़क गया, जबकि निफ्टी50 **25,500** के स्तर के नीचे आ गया।

RBI का 'धैर्य और सतर्कता' का संदेश

RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने फरवरी 2026 की अपनी बैठक में रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखने का फैसला किया है। साथ ही, पॉलिसी के रुख को 'न्यूट्रल' बनाए रखा गया है। यह निर्णय बाजार की उम्मीदों के अनुरूप था, लेकिन इसने निवेशकों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। बाजार में तुरंत बिकवाली शुरू हो गई, जिसके चलते सेंसेक्स में 350 अंकों से अधिक की गिरावट आई और निफ्टी50 25,500 के अहम स्तर से नीचे चला गया। केंद्रीय बैंक ने 'डेटा-संचालित' दृष्टिकोण पर जोर दिया और 'धैर्य एवं सतर्कता' की बात कही। RBI का यह रुख वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों और कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए, ब्याज दरों में कटौती की किसी भी तत्काल उम्मीद को दबाने वाला साबित हुआ।

घरेलू अर्थव्यवस्था के मजबूत संकेत, जैसे कि फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए 7.4% की अनुमानित GDP ग्रोथ और 2.1% पर रहने का अनुमानित CPI, के बावजूद बाजार ने बाहरी जोखिमों को अधिक महत्व दिया। RBI द्वारा फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए CPI इन्फ्लेशन के अनुमान को पहली तिमाही के लिए 4.0% और दूसरी तिमाही के लिए 4.2% तक बढ़ाए जाने से भी इस सतर्क दृष्टिकोण को बल मिला।

वैश्विक झटके और सेक्टर्स पर मार

वैश्विक बाजारों में आई गिरावट, खासकर टेक-हैवी नैस्डैक (Nasdaq) में 6% की गिरावट, ने घरेलू ट्रेडिंग पर गहरा असर डाला। सिल्वर (Silver) जैसी कमोडिटी की कीमतें भी $71 के अपने हालिया उच्च स्तर से नीचे आ गईं। इस वैश्विक माहौल ने भारतीय इक्विटीज को भी प्रभावित किया, जिससे व्यापक गिरावट देखी गई।

खास तौर पर, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT) सेक्टर पर भारी मार पड़ी। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के शेयर 2.41% और इन्फोसिस (Infosys) के शेयर 1.40% गिर गए। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के पारंपरिक सॉफ्टवेयर सेवाओं पर पड़ने वाले संभावित disruptive असर की चिंताओं ने IT शेयरों में गिरावट को और बढ़ाया।

अन्य प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) 1.60% और अडानी पोर्ट्स 1.52% शामिल थे। हालांकि, कुछ डिफेंसिव सेक्टर्स और चुनिंदा ब्लू-चिप कंपनियों ने सहारा दिया। ITC लिमिटेड 3.42% की बढ़त के साथ टॉप गेनर्स में से एक रहा। इसके अलावा, कोटक महिंद्रा बैंक (2.25%), भारती एयरटेल (1.65%) और बजाज फाइनेंस (0.90%) में भी अच्छी तेजी दिखी। निफ्टी FMCG सेक्टर में 0.91%, निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.29% और निफ्टी ऑयल एंड गैस में 0.26% की बढ़त दर्ज की गई। ब्रॉडर मार्केट्स पर भी दबाव रहा, निफ्टी मिडकैप 100 में 0.7% से अधिक और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में लगभग 1% की गिरावट आई।

एक्सपर्ट्स की राय और वैल्यूएशन

जानकार भी RBI की सतर्कता को वैश्विक अनिश्चितता से जोड़ रहे हैं। ग्रीन पोर्टफोलियो PMS के को-फाउंडर दिवम शर्मा का कहना है कि भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत है, लेकिन निकट भविष्य में बाजार की चाल लिक्विडिटी और महंगाई के आंकड़ों पर निर्भर करेगी। राइट हॉराइजन्स PMS के फाउंडर अनिल रेगो ने बताया कि स्थिर पॉलिसी बैंकिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे सेक्टर्स के लिए सहायक है। जीजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार ने कहा कि नैस्डैक और कमोडिटीज में कमजोरी सहित वैश्विक 'रिस्क-ऑफ' सेंटीमेंट प्रमुख कारक हैं।

वैल्यूएशन के मोर्चे पर, ऐसा लगता है कि बाजार मौजूदा स्तरों पर कुछ ग्रोथ सेगमेंट में थोड़ा खिंचा हुआ (stretched) महसूस कर रहा है। सेंसेक्स का P/E (प्राइस-टू-अर्निंग्स) रेश्यो लगभग 23.050 के आसपास कारोबार कर रहा था, जबकि TCS जैसे बड़े IT स्टॉक का P/E लगभग 22.27 था। AI से जुड़ी चिंताएं और ये वैल्यूएशन IT सेक्टर में बिकवाली के दबाव का कारण बने।

आगे क्या?

RBI ने फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए भारत की GDP ग्रोथ 7.4% रहने का अनुमान लगाया है और फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली छमाही के लिए अपने दृष्टिकोण को थोड़ा ऊपर किया है, जो आर्थिक लचीलेपन का संकेत देता है। हालांकि, आने वाले महंगाई के आंकड़े और वैश्विक लिक्विडिटी की स्थितियां निकट भविष्य में बाजार की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। केंद्रीय बैंक का सतर्क रुख यह बताता है कि वे भविष्य की पॉलिसी समायोजन के प्रति धैर्यपूर्ण दृष्टिकोण रखेंगे, जिससे निवेशकों को वैश्विक अनिश्चितताओं और घरेलू विकास की गतिशीलता के बीच रास्ता खोजना होगा।

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