RBI Policy Update: रेपो रेट में **0.25%** की बढ़ोतरी, ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर **7.1%** किया

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AuthorAditya Rao|Published at:
RBI Policy Update: रेपो रेट में **0.25%** की बढ़ोतरी, ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर **7.1%** किया

RBI ने रेपो रेट को **25 बेसिस पॉइंट्स** बढ़ाकर **5.50%** कर दिया है। साथ ही, फाइनेंशियल ईयर **2027** के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान **6.7%** से बढ़ाकर **7.1%** कर दिया गया है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी मौद्रिक नीति में बड़ा बदलाव करते हुए बेंचमार्क रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 5.50% कर दिया है। 7 अक्टूबर 2026 को हुई मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की बैठक में यह फैसला लिया गया। इसके साथ ही, RBI ने अपना रुख बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' (Calibrated Tightening) कर लिया है।

ग्रोथ और महंगाई का संतुलन

जहां एक तरफ RBI ने फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% किया है, वहीं महंगाई पर चिंता भी जताई है। RBI ने CPI इन्फ्लेशन का अनुमान 5.0% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ किया कि ग्लोबल कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण महंगाई का दबाव बना हुआ है, जिसे नियंत्रित करना फिलहाल प्राथमिकता है।

लोन लेने वालों पर क्या होगा असर?

रेपो रेट बढ़ने का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। अब बैंकों के लिए फंड जुटाना महंगा हो जाएगा, जिसके चलते होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरें बढ़ने की पूरी संभावना है। कॉर्पोरेट इंडिया के लिए भी कर्ज महंगा होगा, जिससे उन कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है जिन पर कर्ज का बोझ ज्यादा है।

आगे की राह

RBI के 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' के स्टैंड से संकेत मिलते हैं कि ब्याज दरें फिलहाल लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं, यानी फिलहाल किसी कटौती की उम्मीद कम है। बाजार अब इस पर नजर रखेगा कि ऊंची ब्याज दरों का असर खपत (Consumption) और इन्वेस्टमेंट पर कैसा पड़ता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.